LPG Gas Crisis: महाराष्ट्र के प्रमुख औद्योगिक इलाकों से एक गंभीर खबर सामने आई है, जहां एलपीजी गैस की कमी के कारण ऑटो पार्ट्स उद्योग पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। गैस आपूर्ति में कमी के चलते कई मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों के सामने उत्पादन रोकने की नौबत आ गई है।
सूत्रों के अनुसार Chakan, Pimpri-Chinchwad और Chhatrapati Sambhajinagar जैसे बड़े औद्योगिक केंद्रों में स्थिति काफी चिंताजनक बनती जा रही है। यहां ऑटो कंपोनेंट बनाने वाली हजारों छोटी और मध्यम कंपनियां गैस संकट से जूझ रही हैं।
इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में टियर-2 और टियर-3 सप्लायर काम करते हैं, जो कार, दोपहिया और ट्रकों के लिए जरूरी पुर्जे तैयार करते हैं। यदि गैस की सप्लाई जल्द सामान्य नहीं हुई तो इन कंपनियों का उत्पादन पूरी तरह ठप हो सकता है।
उद्योग संगठनों ने सरकार से लगाई गुहार
ऑटो पार्ट्स उद्योग से जुड़े संगठनों ने इस संकट को लेकर राज्य और केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि गैस सप्लाई को तुरंत बहाल करना बेहद जरूरी है, क्योंकि अगर अनिश्चितता जारी रही तो पूरे भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।
उद्योग प्रतिनिधियों के मुताबिक कई फैक्ट्रियों में अब केवल दो से चार दिनों का ही गैस स्टॉक बचा है। इसके बाद उत्पादन रोकने की स्थिति बन सकती है।
मशीनें बंद होने का खतरा
फैक्ट्री संचालकों का कहना है कि गैस केवल एक ईंधन नहीं है जिसे तुरंत बंद और चालू किया जा सके। यदि गैस की सप्लाई अचानक बंद हो जाती है तो मशीनें भी बंद हो जाएंगी।
मशीनों को दोबारा चालू करने की प्रक्रिया में ही 24 से 48 घंटे तक का समय लग सकता है, जिससे उत्पादन और आर्थिक नुकसान दोनों बढ़ सकते हैं।
छोटे उद्योगों पर सबसे ज्यादा असर
**Chhatrapati Sambhajinagar के चिकालठाणा, शेंद्र, वालुज और बिडकिन जैसे औद्योगिक इलाकों में छोटे और मध्यम उद्योगों की स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर बताई जा रही है।
इन क्षेत्रों में गियर, शाफ्ट और फोर्जिंग पार्ट्स जैसे अहम ऑटो कंपोनेंट बनाए जाते हैं। ये पुर्जे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों की असेंबली लाइनों के लिए बेहद जरूरी होते हैं। यदि इनकी सप्लाई रुकती है तो वाहन निर्माण की पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
गुजरात के साणंद में भी बढ़ी चिंता
गैस संकट का असर अब महाराष्ट्र से बाहर भी दिखाई देने लगा है। पड़ोसी राज्य गुजरात के **Sanand औद्योगिक क्षेत्र में भी उद्योग संगठनों ने चिंता जताई है।
साणंद इंडस्ट्रियल बेल्ट के प्रतिनिधियों का कहना है कि अगर सप्लाई चेन में यह रुकावट जारी रही तो इसका “डोमिनो इफेक्ट” पूरे देश के ऑटोमोबाइल उत्पादन पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर गैस की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो हजारों छोटी कंपनियां उत्पादन बंद करने के लिए मजबूर हो सकती हैं, जिससे रोजगार और ऑटो उद्योग दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

