INX Media Case: INX मीडिया से जुड़े बहुचर्चित मनी लॉन्ड्रिंग केस में पूर्व वित्त मंत्री P. Chidambaram की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) को उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की सरकारी मंजूरी मिल गई है। सक्षम प्राधिकरण से 10 फरवरी 2026 को स्वीकृति मिलने के बाद एजेंसी ने दिल्ली की Rouse Avenue Court में आवश्यक दस्तावेज दाखिल कर दिए हैं। इससे अब मामले की सुनवाई आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।
2017 में शुरू हुई थी जांच
यह मामला 2017 में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत दर्ज किया गया था। जांच की नींव Central Bureau of Investigation (CBI) की उस एफआईआर पर आधारित है, जिसमें INX मीडिया और उससे जुड़े लोगों पर आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे। इस प्रकरण में चिदंबरम के बेटे Karti Chidambaram का नाम भी शामिल है।
क्या हैं आरोप?
जांच एजेंसी के अनुसार, जब पी. चिदंबरम वित्त मंत्री के पद पर थे, उस समय INX मीडिया को विदेशी निवेश से संबंधित मंजूरी दी गई थी। आरोप है कि इस मंजूरी को प्राप्त करने और बाद में उसमें आई कथित अनियमितताओं को नियमित करने के बदले रिश्वत ली गई।
ED का दावा है कि कथित रिश्वत की राशि कार्ति चिदंबरम से जुड़ी कंपनियों के माध्यम से ली गई और फिर शेल कंपनियों के जरिए विभिन्न देशों में घुमाकर निवेश के रूप में दर्शाई गई। एजेंसी के अनुसार, इस पूरे मामले में लगभग 65.88 करोड़ रुपये की अवैध कमाई सामने आई है।
संपत्तियां पहले ही अटैच
ED ने अपनी जांच के दौरान कई संपत्तियों और बैंक खातों को अस्थायी रूप से अटैच किया था। एजेंसी का कहना है कि इन अटैचमेंट्स को संबंधित प्राधिकरण द्वारा भी पुष्टि मिल चुकी है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत की गई थी, ताकि कथित अवैध संपत्तियों को सुरक्षित रखा जा सके।
चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट
इस मामले में ED ने जून 2020 में पहली चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें पी. चिदंबरम सहित अन्य आरोपियों के नाम शामिल थे। इसके बाद दिसंबर 2024 में एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी अदालत में प्रस्तुत की गई। इन दस्तावेजों में एजेंसी ने कथित वित्तीय लेनदेन और संबंधित कंपनियों के नेटवर्क का विस्तृत ब्यौरा दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ी प्रक्रिया
सरकारी मंजूरी की आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि Supreme Court of India ने नवंबर 2024 में एक अहम फैसला सुनाया था। शीर्ष अदालत ने कहा था कि पूर्व या वर्तमान सरकारी अधिकारियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में मुकदमा चलाने से पहले सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इसी निर्णय के अनुरूप ED ने स्वीकृति मांगी थी, जो अब प्रदान कर दी गई है।
आगे क्या?
सरकारी सैंक्शन मिलने के बाद अब अदालत में इस मामले की सुनवाई गति पकड़ सकती है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अभियोजन की मंजूरी मिलने से ट्रायल की प्रक्रिया में तेजी आएगी और आरोपों पर विस्तार से बहस होगी।
हालांकि, बचाव पक्ष की ओर से आरोपों को पहले भी खारिज किया जाता रहा है। अब अदालत में दोनों पक्षों के तर्कों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की दिशा तय होगी।
INX मीडिया मामला पिछले कई वर्षों से राजनीतिक और कानूनी बहस का केंद्र रहा है। सरकारी स्वीकृति के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत में यह बहुचर्चित केस किस दिशा में आगे बढ़ता है और न्यायिक प्रक्रिया में क्या निष्कर्ष निकलते हैं।

