Aditya Puri on AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने आईटी और बैंकिंग सेक्टर में नई बहस छेड़ दी है। ऑटोमेशन, मशीन लर्निंग और जनरेटिव एआई टूल्स के बढ़ते प्रभाव के बीच कई निवेशकों और पेशेवरों को डर है कि पारंपरिक नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। लेकिन Aditya Puri, जो HDFC Bank के पूर्व सीईओ रह चुके हैं, इस आशंका को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया डर मानते हैं।
उनका कहना है कि एआई निश्चित रूप से काम करने के तरीके को बदलेगा, लेकिन यह मान लेना कि इससे बड़े पैमाने पर नौकरियां खत्म हो जाएंगी, पूरी तरह सही नहीं है। इतिहास गवाह है कि हर तकनीकी क्रांति के साथ कुछ भूमिकाएं खत्म हुईं, लेकिन उससे कहीं ज्यादा नए अवसर भी पैदा हुए।
टेक्नोलॉजी बदलाव का इतिहास
आदित्य पुरी का मानना है कि जब कंप्यूटर आए थे, तब भी बड़े पैमाने पर नौकरी जाने का डर था। इंटरनेट और डिजिटल बैंकिंग के दौर में भी यही आशंका जताई गई थी। लेकिन समय के साथ टेक्नोलॉजी ने नए सेक्टर, नई स्किल्स और नए रोजगार के अवसर पैदा किए।
उनके मुताबिक, एआई भी इसी क्रम का अगला चरण है। यह दोहराव वाले और रूटीन कामों को ऑटोमेट करेगा, लेकिन इससे कर्मचारियों को अधिक विश्लेषणात्मक, रचनात्मक और निर्णय आधारित भूमिकाओं में काम करने का मौका मिलेगा। आने वाले वर्षों में “ह्यूमन + एआई” मॉडल विकसित होगा, जहां इंसान और मशीन मिलकर काम करेंगे।
आईटी सेक्टर और पारंपरिक बिजनेस मॉडल
आईटी सेक्टर में खासतौर पर यह चिंता है कि एआई टूल्स के कारण सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, टेस्टिंग और सपोर्ट जैसी सेवाओं की मांग घट सकती है। कई निवेशक मानते हैं कि इससे पारंपरिक आउटसोर्सिंग मॉडल पर असर पड़ सकता है।
हालांकि पुरी का मानना है कि कंपनियों को अपनी रणनीति बदलनी होगी। जो कंपनियां एआई को अपनाएंगी और कर्मचारियों को नई स्किल्स में प्रशिक्षित करेंगी, वे आगे बढ़ेंगी। टेक्नोलॉजी बदलाव से डरने के बजाय उसे अपनाना ही भविष्य की कुंजी है।
बैंकिंग सेक्टर पर एआई का प्रभाव
बैंकिंग क्षेत्र पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में अब भी बड़ी आबादी औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से पूरी तरह नहीं जुड़ी है। वित्तीय समावेशन की दिशा में अभी काफी काम होना बाकी है।
उन्होंने बताया कि बैंकों के डिपॉजिट का बड़ा हिस्सा अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों से आता है। ऐसे में यह कहना कि बैंक जमा पूरी तरह से शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड्स में शिफ्ट हो रहे हैं, अतिशयोक्ति है। देश की कुल आबादी का छोटा हिस्सा ही सीधे इक्विटी बाजार में निवेश करता है।
SIP और निवेश का बदलता ट्रेंड
हाल के वर्षों में म्यूचुअल फंड्स, खासकर सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP), में लोगों की भागीदारी बढ़ी है। इससे बैंक डिपॉजिट ग्रोथ पर कुछ असर जरूर पड़ा है। लेकिन पुरी के अनुसार, बैंकिंग सिस्टम की बुनियाद अभी भी मजबूत है।
उनका कहना है कि एआई बैंकिंग सेक्टर में कस्टमर सर्विस, फ्रॉड डिटेक्शन, डेटा एनालिटिक्स और जोखिम प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सुधार लाएगा। इससे दक्षता बढ़ेगी और ग्राहकों को बेहतर अनुभव मिलेगा।
भविष्य की तैयारी जरूरी
पुरी ने यह भी जोर दिया कि आने वाले समय में कर्मचारियों को अपनी स्किल्स को अपग्रेड करना होगा। डेटा एनालिटिक्स, साइबर सिक्योरिटी, एआई टूल्स की समझ और डिजिटल ऑपरेशंस जैसे क्षेत्रों में दक्षता बढ़ाना जरूरी होगा।
उनका स्पष्ट संदेश है—एआई से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि उसे समझने और अपनाने की जरूरत है। टेक्नोलॉजी बदलाव का हिस्सा बनना ही दीर्घकालिक सफलता की कुंजी है।
एआई निश्चित रूप से उद्योगों के काम करने के तरीके को बदलेगा, लेकिन इसे नौकरियों के पूर्ण अंत के रूप में देखना सही नहीं है। इतिहास बताता है कि हर तकनीकी बदलाव के साथ नई संभावनाएं जन्म लेती हैं। सही नीति, स्किल डेवलपमेंट और अनुकूलन के साथ एआई भविष्य की अर्थव्यवस्था को अधिक उत्पादक और समावेशी बना सकता है।

