Indian Railways budget 2026: भारतीय रेलवे अब अपने इतिहास के सबसे बड़े बदलाव की ओर तेजी से बढ़ रहा है। केंद्र सरकार ने बजट 2026-27 में रेलवे के लिए रिकॉर्ड 2.78 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय तय किया है, जो इस क्षेत्र को आधुनिक, सुरक्षित और हाई-स्पीड बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह निवेश न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा, बल्कि भारत की आर्थिक गति को भी नई रफ्तार देगा।
इस बड़े विजन के केंद्र में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क है। सरकार ने सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने की योजना बनाई है, जिन्हें “विकास कनेक्टर” के रूप में देखा जा रहा है। इन कॉरिडोर का उद्देश्य देश के प्रमुख शहरों और आर्थिक केंद्रों को जोड़ना है, ताकि लोगों की आवाजाही तेज और आसान हो सके। प्रस्तावित मार्गों में मुंबई-पुणे, दिल्ली-वाराणसी और हैदराबाद-बेंगलुरु जैसे महत्वपूर्ण रूट शामिल हैं। इन सभी कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 4,000 किलोमीटर होगी।
भारत का पहला हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट Mumbai-Ahmedabad High-Speed Rail Corridor इस दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। 508 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर 320 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से ट्रेन संचालन के लिए तैयार किया जा रहा है। यह परियोजना भारत को हाई-स्पीड रेल के नए युग में प्रवेश कराने वाली है, जिससे इंटरसिटी यात्रा में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।
रेलवे केवल गति ही नहीं, बल्कि डिजिटल कनेक्टिविटी पर भी जोर दे रहा है। देशभर के 1,396 स्टेशनों पर आईपी-एमपीएलएस आधारित एकीकृत दूरसंचार नेटवर्क लागू किया गया है। इससे ट्रेन रेडियो संचार, आरक्षण प्रणाली और वीडियो निगरानी जैसी सेवाएं अधिक प्रभावी और तेज होंगी। यात्रियों को बेहतर सूचना देने के लिए 1,405 स्टेशनों पर रियल-टाइम पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम भी शुरू किया जा चुका है।
सुरक्षा के क्षेत्र में भी बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। स्वदेशी Kavach स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली को 3,100 किलोमीटर से अधिक रेल मार्ग पर लागू किया जा चुका है, जबकि 24,400 किलोमीटर अतिरिक्त मार्ग पर इसका काम जारी है। यह सिस्टम ट्रेनों के बीच टक्कर को रोकने और दुर्घटनाओं को कम करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इसके अलावा, 1,874 रेलवे स्टेशनों पर एआई-सक्षम वीडियो निगरानी प्रणाली स्थापित की गई है, जिससे सुरक्षा और निगरानी और अधिक मजबूत हुई है। इन तकनीकी सुधारों का उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित और भरोसेमंद यात्रा अनुभव देना है।
रेलवे के संचालन की बात करें तो 2025-2026 के दौरान प्रतिदिन लगभग 25,000 ट्रेनें चलाई जा रही हैं। त्योहारों और विशेष अवसरों पर बढ़ती भीड़ को संभालने के लिए दिसंबर 2025 तक करीब 65,000 विशेष ट्रेनें भी चलाई गईं, जिससे यात्रियों को काफी राहत मिली।
‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत रेलवे में आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिल रहा है। 2025-2026 के दौरान 1,674 लोकोमोटिव का उत्पादन किया गया, जो घरेलू निर्माण क्षमता में बढ़ोतरी का संकेत है। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि देश की औद्योगिक ताकत भी मजबूत होगी।
डिजिटल सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए जुलाई 2025 में RailOne ऐप लॉन्च किया गया। इस ऐप के जरिए यात्री टिकट बुकिंग, ट्रेन की जानकारी और शिकायत निवारण जैसी सभी सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर प्राप्त कर सकते हैं। यह रेलवे के डिजिटलीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।
माल ढुलाई के क्षेत्र में भी सुधार किए जा रहे हैं। 35 ‘गति शक्ति’ कार्गो टर्मिनल शुरू किए गए हैं, जिससे लॉजिस्टिक्स और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलेगा। इससे उद्योगों को तेज और सस्ती परिवहन सुविधा मिलेगी, जो आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
स्टेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने के लिए Amrit Bharat Station Scheme के तहत 119 रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास किया गया है। इन स्टेशनों पर आधुनिक सुविधाएं, बेहतर यात्री सेवाएं और आकर्षक डिजाइन देखने को मिलेंगे।
कुल मिलाकर, भारतीय रेलवे का यह मेगा प्लान देश के परिवहन ढांचे को नई ऊंचाई देने वाला है। हाई-स्पीड ट्रेनों से लेकर डिजिटल सेवाओं और उन्नत सुरक्षा प्रणालियों तक, हर पहलू में बदलाव दिखाई दे रहा है। आने वाले वर्षों में यह बदलाव न केवल यात्रा को आसान बनाएगा, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था को भी नई गति देगा।

