Caste Census: कांग्रेस ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर जाति जनगणना को लेकर तीखा हमला बोला है। पार्टी का आरोप है कि Narendra Modi के नेतृत्व वाली सरकार जानबूझकर इस महत्वपूर्ण मुद्दे को टाल रही है, ताकि अन्य पिछड़े वर्ग (OBC) की महिलाओं को आरक्षण देने से बचा जा सके।
बुधवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। पार्टी के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष Rajendra Pal Gautam, ओबीसी विभाग के प्रमुख Anil Jaihind और अन्य नेताओं ने संयुक्त रूप से आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जातिगत जनगणना को ठंडे बस्ते में डालने की रणनीति अपना रही है।
प्रेस वार्ता के दौरान अनिल जयहिंद ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा “मनुवादी मानसिकता” से प्रभावित है, जिसके चलते वे सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से नहीं लेते। उनका दावा था कि सरकार को यह स्पष्ट रूप से पता है कि अगर 2027 तक जातिगत जनगणना के आंकड़े सामने आ जाते हैं, तो OBC वर्ग, खासकर महिलाओं को आरक्षण देने का दबाव काफी बढ़ जाएगा।
जयहिंद ने पिछले लोकसभा चुनाव के नतीजों का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा ने “400 पार” का नारा दिया था, लेकिन वह केवल 240 सीटों तक ही सीमित रह गई। उनके अनुसार, इस परिणाम के बाद भाजपा और आरएसएस के भीतर जातिगत जनगणना कराने को लेकर चर्चा जरूर हुई, लेकिन वास्तविकता में सरकार इसे लागू करने से बच रही है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जाति जनगणना केवल एक सांख्यिकीय प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। उनका तर्क है कि बिना सटीक आंकड़ों के, पिछड़े वर्गों के लिए प्रभावी नीतियां बनाना संभव नहीं है। पार्टी का मानना है कि OBC महिलाओं को आरक्षण देने के लिए भी ठोस डेटा की जरूरत है, जो केवल जातिगत जनगणना से ही मिल सकता है।
इसके साथ ही कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार सामाजिक न्याय के मुद्दों पर केवल राजनीतिक बयानबाजी कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। नेताओं का कहना है कि अगर सरकार वास्तव में पिछड़े वर्गों के हित में काम करना चाहती है, तो उसे तुरंत जातिगत जनगणना कराने का फैसला लेना चाहिए।
हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से इस विषय पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। भाजपा पहले भी यह कह चुकी है कि जनगणना एक जटिल प्रक्रिया है और इसमें कई प्रशासनिक और तकनीकी चुनौतियां होती हैं। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि यह केवल एक बहाना है और असल कारण राजनीतिक है।
इस मुद्दे ने एक बार फिर देश की राजनीति में सामाजिक न्याय और आरक्षण की बहस को तेज कर दिया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है और क्या जातिगत जनगणना को लेकर कोई ठोस कदम उठाया जाता है।

