Gyanvapi Case: वाराणसी के ज्ञानवापी मुद्दे को लेकर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने सोमवार को विवादित स्थल पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत का फैसला आने के बाद वहां जलाभिषेक किया जाएगा और भगवा ध्वज फहराया जाएगा। उन्होंने काशी में बाबा विश्वनाथ मंदिर के पास स्थित ज्ञानवापी ढांचे को लेकर भी कड़ी टिप्पणी की।
वाराणसी में एक निजी कार्यक्रम में पहुंचे शास्त्री ने संकेत देते हुए कहा कि इस मामले में न्यायालय का निर्णय जल्द आ सकता है और फैसले के बाद धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और धार्मिक हलकों में प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।
इधर, बरेली में ‘आल इंडिया मुस्लिम जमात’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी ने शास्त्री के बयान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी एक मस्जिद है और उसे किसी भी तरह से ‘कलंक’ कहना गलत और आपत्तिजनक है। रजवी का आरोप है कि इस तरह के बयान समाज में तनाव बढ़ाने का काम करते हैं।
मौलाना रजवी ने कहा कि यह मामला फिलहाल अदालत में लंबित है और अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा ही लिया जाएगा, जिसे सभी पक्षों को स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की बयानबाजी से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने मांग की कि अदालत को इस तरह के विवादित और भड़काऊ बयानों का स्वत: संज्ञान लेना चाहिए और संबंधित व्यक्ति से जवाब तलब करना चाहिए। रजवी ने यह भी स्पष्ट किया कि शरीयत के अनुसार किसी भी धार्मिक स्थल को तोड़कर दूसरे धर्म का ढांचा बनाना स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद है और आगे भी मस्जिद ही रहेगी, इस मुद्दे पर किसी प्रकार का समझौता संभव नहीं है।

