Census 2027: भारत में जनगणना की प्रक्रिया अब एक नए और आधुनिक दौर में प्रवेश करने जा रही है। Census 2027 को पूरी तरह डिजिटल तरीके से आयोजित किया जाएगा, जो इसे अब तक की सबसे उन्नत जनगणना बनाता है। नई दिल्ली में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जनगणना आयुक्त Mrityunjay Kumar Narayan ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की।
इस बार की जनगणना पारंपरिक कागजी प्रक्रिया से हटकर पूरी तरह तकनीक आधारित होगी। इसका उद्देश्य डेटा संग्रह को तेज, सटीक और पारदर्शी बनाना है। पूरी प्रक्रिया को चार चरणों में बांटा गया है, ताकि हर स्तर पर डेटा की जांच और सत्यापन सुनिश्चित किया जा सके।
चार चरणों में पूरी होगी जनगणना
पहले चरण में नागरिकों को “सेल्फ एन्यूमरेशन” का विकल्प दिया जाएगा। इसके तहत लोग खुद ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी भर सकेंगे। यह सुविधा लोगों को अपने घर बैठे आसानी से डेटा दर्ज करने का अवसर देगी।
दूसरे चरण में सरकारी कर्मचारी घर-घर जाकर इस जानकारी का सत्यापन करेंगे। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ऑनलाइन भरी गई जानकारी सही और पूर्ण है।
तीसरे चरण में सुपरवाइजर द्वारा डेटा का क्रॉस चेक किया जाएगा। एक सुपरवाइजर के अंतर्गत कई कर्मचारी काम करेंगे और वे पूरे डेटा की समीक्षा करेंगे, ताकि किसी भी तरह की गलती या कमी को सुधारा जा सके।
अंतिम और चौथे चरण में सभी सूचनाओं को एकत्र कर अंतिम डेटा तैयार किया जाएगा। इस मल्टी-लेयर प्रक्रिया से जनगणना की विश्वसनीयता और गुणवत्ता में काफी सुधार होगा।
जाति जनगणना कब होगी?
अधिकारियों के अनुसार, जनगणना को दो मुख्य हिस्सों में विभाजित किया गया है। पहले चरण में घरों और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएगी, जबकि दूसरे चरण में जनसंख्या से संबंधित विस्तृत आंकड़े जुटाए जाएंगे। इसी दूसरे चरण में जातिगत आंकड़ों का संग्रह भी किया जाएगा।
1 अप्रैल 2026 से होगी शुरुआत
जनगणना का पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा। इस दौरान नागरिकों से करीब 33 सवाल पूछे जाएंगे, जिनमें घर, सुविधाएं और जीवनशैली से जुड़ी जानकारी शामिल होगी।
इस बार एक खास बदलाव यह भी किया गया है कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़े, यदि वे अपने रिश्ते को स्थायी मानते हैं, तो खुद को विवाहित के रूप में दर्ज कर सकते हैं। यह कदम समाज में बदलती जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
ऑनलाइन पोर्टल से आसान प्रक्रिया
सरकार ने इसके लिए एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया है, जहां लोग आसानी से अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इस पोर्टल में FAQ सेक्शन भी उपलब्ध होगा, जिससे लोगों को प्रक्रिया समझने में मदद मिलेगी।
इस डिजिटल पहल से न केवल प्रक्रिया सरल होगी, बल्कि ज्यादा से ज्यादा लोगों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
हाउसिंग जनगणना से होगी शुरुआत
पहले चरण को “हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना” कहा जाएगा। इसमें घरों की स्थिति, सुविधाएं और आवासीय जानकारी एकत्र की जाएगी। यह डेटा सरकार को भविष्य की योजनाएं बनाने और संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में मदद करेगा।
इसके बाद दूसरे चरण में जनसंख्या से जुड़े विस्तृत आंकड़े जुटाए जाएंगे, जो सामाजिक और आर्थिक नीतियों के निर्माण में सहायक होंगे।
मोबाइल ऐप और 30 लाख कर्मचारी
इस बार करीब 30 लाख सरकारी कर्मचारी इस प्रक्रिया में शामिल होंगे। ये सभी कर्मचारी मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से डेटा संग्रह करेंगे, जिससे पूरी प्रक्रिया पेपरलेस हो जाएगी।
इस डिजिटल सिस्टम से डेटा तुरंत अपलोड किया जा सकेगा, जिससे समय की बचत होगी और त्रुटियों की संभावना कम होगी। साथ ही, डेटा की पारदर्शिता और सटीकता भी बढ़ेगी।
क्यों खास है Census 2027?
Census 2027 भारत की जनगणना के इतिहास में एक बड़ा बदलाव लेकर आ रहा है। इसमें तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है, जिससे डेटा संग्रह की प्रक्रिया तेज और विश्वसनीय बनेगी।
डिजिटल प्लेटफॉर्म, रियल-टाइम डेटा कलेक्शन और मल्टी-लेयर वेरिफिकेशन के जरिए यह जनगणना न केवल समय बचाएगी, बल्कि बेहतर गुणवत्ता वाले आंकड़े भी प्रदान करेगी। ये आंकड़े भविष्य की सरकारी नीतियों, योजनाओं और विकास कार्यक्रमों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे।
इस तरह Census 2027 भारत के डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो देश को डेटा-आधारित निर्णय लेने में और अधिक सक्षम बनाएगा।

