यह अत्यंत संतोष व हर्ष का विषय है कि आज के डिजिटल युग में सभी लोग और खास कर बच्चे भी जहां किसी न किसी गैजेट में डूबे या घिरे बैठे हैं, वहीं इन बालकों के लिए बाल साहित्य भी बाल लेखकों के द्वारा भरपूर मात्रा में लिखा जा रहा है और बच्चे इस साहित्य को साथ-साथ रंग-बिरंगे सजे-सजाये आकर्षक पुस्तकाकार रूप में पढ़ भी रहे हैं।
इसी कड़ी में बाल साहित्य को समृद्ध करती समृद्ध प्रकाशन से प्रकाशित लेखिका सुशीला शर्मा की यह सद्य प्रकाशित पुस्तक तैयार होकर आई है। बच्चों की परंपरागत पुस्तकों से अलग हटकर विषय-वस्तु अपने में समेटे यह पुस्तक निश्चित तौर पर खासकर बच्चों के लिए जहां पठनीय, उपयोगी है, वहीं पर उनके ज्ञानवर्धन के लिए मेरा मानना है कि जरूरी है।
पहेलियां कहने-बूझने की परंपरा हमारे यहां परंपरागत चली आ रही है। इस पुस्तक में शामिल इन पहेलियों, गीतों के माध्यम से जहां बच्चों की पठनीयता बढ़ती है वहीं पर पाठक बच्चों का दिमाग भी तेज होता है। ये कैसी पहेलियां हैं, कितनी हैं, यह सब तो बच्चों, आप इस पुस्तक को पढ़कर ही जान सकोगे। क्योंकि जैसा कि इस पुस्तक के शीर्षक से ही ज्ञात हो रहा है कि ये पहेलियाँ हैं कि रसभरी जलेबियाँ हैं। वैसे तो इस पुस्तक की लेखिका हर विधा में लिखती रही हैं, पर बच्चों के लिए लिखी पुस्तकों में और खासकर इस पुस्तक में बच्यों के मनोविज्ञान के हिसाब से पाठय सामग्री में कोई भी कमी कहीं भी उन्होंने नहीं छोड़ी है।
पुस्तक साफ-सुथरे तथा नयनभिराम हिंदी फोंट में और उच्च श्रेणी की पाठय सामग्री है और इसी से मेल खाते आकर्षक चित्रों के साथ यह तैयार है। जोकि बालकों को इसे पढ़ने के लिए सहज ही लुभाती है। सभी को और खासकर बच्चों को इस पुस्तक को अपने बुद्धि-विलास के लिए अवश्य पढ़ना ही चाहिए।

