अनुराग जी की लघुकथाएँ: मुस्कान और ममता की झलक

Digital illustration showing two Hindi short stories by Anurag Ji — “Bhulakkad” and “Maa”. The top text reads “अनुराग जी की लघुकथाएँ: मुस्कान और ममता की झलक”. One side shows a humorous couple in a car, and the other depicts a mother dog protecting her puppy from a cow.
A creative artwork showcasing Anurag Ji’s touching Hindi short stories ‘Bhulakkad’ and ‘Maa’, blending humor and emotion with a glimpse of everyday Indian life.

जीवन के छोटे-छोटे प्रसंगों में छिपे गहरे अर्थों को सहजता से शब्दों में पिरो देना — यही अनुराग जी की लेखन शैली की पहचान है। वरिष्ठ पत्रकार और संवेदनशील लेखक अनुराग जी ने वर्षों तक दैनिक हिंदुस्तान, अमर उजाला और जागरण जैसे प्रतिष्ठित अख़बारों में अपनी कलम से समाज के विविध रंगों को उकेरा है। आज वे अपने लोकप्रिय यूट्यूब चैनल ‘लेखकमंच’ के माध्यम से भी साहित्य और जीवन के सरोकारों को नई पीढ़ी तक पहुंचा रहे हैं।

उनकी लघुकथाएँ — ‘भुलक्कड़’ और ‘मां’ — सामान्य जीवन की साधारण-सी घटनाओं के माध्यम से असाधारण मानवीय भावों को बड़ी सहजता से प्रस्तुत करती हैं। पहली कहानी ‘भुलक्कड़’ में रोज़मर्रा की भूल और उस पर मानवीय प्रतिक्रिया में झलकती है हल्की-फुल्की हास्य-चुटकी, जबकि ‘मां’ में एक कुतिया की ममता के रूप में लेखक ने मातृत्व की गहराई को अत्यंत संवेदनशील ढंग से रेखांकित किया है।

दोनों ही रचनाएँ पाठक के चेहरे पर मुस्कान लाने के साथ-साथ दिल को छू लेने वाली हैं — वही मुस्कान, वही स्पर्श, जो सिर्फ़ सच्चे लेखक की कलम से ही निकलता है। खासरपट डॉट काम के साहित्य सेक्शन में आपके लिए लाएं हैं अनुराग जी की दो लघुकथाएं।

भुलक्कड़

उसे घर से थोड़ी दूर जाने पर ध्यान आया कि चश्मा तो है ही नहीं। उसने कार घर की ओर मोड़ ली। वह कार में बैठे-बैठे चिल्लाकर पत्नी से बोला, ‘‘चश्मा छूट गया है। देखना।‘‘ पत्नी ने चश्मा ढूंढ़ा, लेकिन उसे नहीं मिला। वह कार से उतरते हुए झुंझलाकर बोला, ‘‘तुम्हें तो कभी कोई चीज मिलती ही नहीं। मैं खुद ही ढूंढ़ लूंगा।’’ वह जैसे ही कमरे में घुसा, उसकी पत्नी खिलखिलाकर हंस पड़ी। इससे उसकी झुंझलाहट और बढ़ गई। वह खीझकर बोला, ’’मुझे आफिस के लिए देर हो रही है और तुम्हें हंसी आ रही है।’’ पत्नी अपनी हंसी पर काबू करते हुए बोली, ‘‘चश्मा तो तुम्हारे सिर पर है।’’ वह झेंप गया और मुस्कराते हुए कार में बैठ गया।

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मां

मैं और मेरी पत्नी बिजनौर बैराज के बाद ढाबे पर चाय पीने के लिए रुके। सामने रस्सी से बंधा पिल्ला उछल-कूद रहा था। पत्नी ने बिस्किट का पैकेट लिया और उसके सामने रख दिया। वह खाने लगा।  तभी सड़क पर खड़ी गाय बिस्किट की ओर बढ़ने लगी। वहां कुतिया बैठी हुई थी। वह आक्रमक होकर गाय के सामने अड़ गई और भौंक-भौंक कर उसे भगाने लगी। वह गाय के दूसरी ओर चले जाने के बाद ही शांत हुई और अपनी जगह आकर बैठ गई। वह नटखट पिल्ला पूंछ हिलाकर-हिलाकर बेफिक्र बिस्किट खा रहा था।

 

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