Visceral fat: पेट की चर्बी बढ़ने से तेजी से बूढ़ा हो सकता है दिमाग

Visceral fat
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Visceral fat: नई रिसर्च में सामने आया है कि पेट के अंदर जमा होने वाली चर्बी यानी विसरल फैट (Visceral Fat) सिर्फ शरीर ही नहीं बल्कि दिमाग की सेहत के लिए भी बेहद खतरनाक हो सकती है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि अधेड़ उम्र में पेट की चर्बी कम रहने से दिमाग के सिकुड़ने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है और लंबे समय तक सोचने-समझने की क्षमता बेहतर बनी रह सकती है।

Nature Communications में प्रकाशित इस अध्ययन में 533 महिलाओं और पुरुषों के दिमाग और पेट के MRI स्कैन का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने करीब 16 वर्षों तक प्रतिभागियों पर निगरानी रखी और समय-समय पर उनके दिमाग और पेट के MRI स्कैन के साथ-साथ उनकी cognitive performance यानी सोचने-समझने की क्षमता का भी मूल्यांकन किया।

अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों के पेट के अंदर जमा विसरल फैट का स्तर लगातार बढ़ा, उनमें दिमाग की उम्र तेजी से बढ़ने के संकेत दिखाई दिए। वहीं जिन लोगों में यह चर्बी कम थी या समय के साथ घटती रही, उनके दिमाग की संरचनाएं बेहतर स्थिति में बनी रहीं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह अध्ययन पहली बार दिखाता है कि पेट के अंदर जमा विसरल फैट और दिमाग के बूढ़े होने के बीच सीधा और दीर्घकालिक संबंध मौजूद है।

क्या होता है विसरल फैट?

विसरल फैट वह खतरनाक चर्बी होती है जो पेट के अंदर गहराई में शरीर के महत्वपूर्ण अंगों जैसे लिवर, आंतों और अन्य अंगों के आसपास जमा होती है। इसे “हिडन फैट” या “एक्टिव फैट” भी कहा जाता है क्योंकि यह शरीर के मेटाबॉलिज्म और हार्मोनल सिस्टम को सीधे प्रभावित करती है।

यह सामान्य त्वचा के नीचे जमा होने वाली चर्बी से अलग होती है। बाहर से कई लोग सामान्य दिख सकते हैं लेकिन उनके पेट के अंदर विसरल फैट ज्यादा हो सकता है, जो गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है।

शोधकर्ताओं ने बताया कि अध्ययन के दौरान कुछ प्रतिभागियों के पांच वर्षों में तीन अलग-अलग MRI स्कैन किए गए। इनके विश्लेषण से पता चला कि जिन लोगों में विसरल फैट लगातार बढ़ता रहा, उनमें दिमाग का आयतन यानी brain volume तेजी से कम हुआ।

सबसे ज्यादा असर Hippocampus पर देखा गया, जो दिमाग का वह हिस्सा है जो याददाश्त और सीखने की क्षमता से जुड़ा होता है। इसके अलावा दिमाग के वेंट्रिकल्स यानी कोटरों का आकार भी तेजी से बढ़ता पाया गया, जिसे दिमाग के बूढ़े होने का संकेत माना जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पेट की चर्बी और दिमाग के बूढ़े होने के बीच संबंध मुख्य रूप से ग्लूकोज कंट्रोल और इंसुलिन संवेदनशीलता से जुड़ा हुआ है। जब शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ती है और ब्लड शुगर कंट्रोल खराब होता है, तो इसका असर दिमाग की कोशिकाओं पर भी पड़ता है।

दिलचस्प बात यह है कि अध्ययन में पाया गया कि त्वचा के नीचे जमा होने वाली सामान्य चर्बी से दिमाग को उतना नुकसान नहीं होता जितना विसरल फैट से होता है।

रिसर्च के अनुसार, केवल वजन कम करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि खासतौर पर पेट की अंदरूनी चर्बी को कम करना ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि 18 महीने तक किए गए डाइटरी इंटरवेंशन के दौरान जिन लोगों की पेट की चर्बी घटी, उनमें पांच और दस साल बाद दिमाग की संरचनाएं ज्यादा सुरक्षित पाई गईं।

विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ खानपान, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और शारीरिक गतिविधियां विसरल फैट को कम करने में मदद कर सकती हैं। तेज चलना, कार्डियो एक्सरसाइज और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग जैसी गतिविधियां पेट की चर्बी कम करने के लिए प्रभावी मानी जाती हैं।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, लंबे समय तक बैठकर काम करना, तनाव और अनियमित खानपान के कारण पेट की चर्बी तेजी से बढ़ रही है। डॉक्टरों का मानना है कि अगर समय रहते इसे नियंत्रित नहीं किया गया, तो भविष्य में डिमेंशिया और याददाश्त से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

इस रिसर्च का सबसे बड़ा संदेश यही है कि पेट की चर्बी सिर्फ शरीर की सुंदरता का मामला नहीं है, बल्कि यह दिमाग की लंबी उम्र और मानसिक स्वास्थ्य से भी सीधे जुड़ी हुई है।