Vitamin D deficiency: पहले हड्डियों की कमजोरी और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं को बढ़ती उम्र से जोड़कर देखा जाता था। आमतौर पर लोग 50 या 60 की उम्र के बाद हड्डियों की सेहत को लेकर चिंतित होते थे। लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है। डॉक्टरों का कहना है कि आजकल 30 साल या उससे कम उम्र के लोगों में भी हड्डियों के कमजोर होने के शुरुआती संकेत दिखाई देने लगे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे सबसे बड़ा कारण आधुनिक शहरी जीवनशैली है। लंबे समय तक घर या ऑफिस के अंदर रहना, धूप से दूरी, कम शारीरिक गतिविधि, अनियमित खानपान और बढ़ता स्क्रीन टाइम युवाओं की हड्डियों को धीरे-धीरे कमजोर कर रहा है।
हड्डियां शरीर का स्थिर हिस्सा नहीं होतीं, बल्कि वे एक जीवित ऊतक यानी living tissue हैं। शरीर में लगातार पुरानी हड्डियां टूटती और नई हड्डियां बनती रहती हैं। कम उम्र में शरीर नई हड्डियां तेजी से बनाता है, लेकिन खराब लाइफस्टाइल के कारण यह संतुलन अब पहले ही बिगड़ने लगा है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि धूप की कमी इसका सबसे बड़ा कारण बन रही है। सूरज की रोशनी शरीर में विटामिन D बनाने में मदद करती है, जो कैल्शियम को शरीर में अवशोषित करने के लिए बेहद जरूरी है।
Indian Council of Medical Research यानी ICMR द्वारा किए गए एक बड़े अध्ययन में पाया गया कि भारत में हर उम्र के लोगों में विटामिन D की कमी तेजी से बढ़ रही है। हैरानी की बात यह है कि धूप वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में भी यह समस्या आम हो चुकी है।
जब शरीर में विटामिन D की कमी होती है, तो कैल्शियम सही तरीके से अवशोषित नहीं हो पाता। धीरे-धीरे हड्डियां अपनी डेंसिटी यानी सघनता खोने लगती हैं और कमजोर होने लगती हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, आज की डेस्क जॉब वाली जीवनशैली भी हड्डियों की सेहत पर बुरा असर डाल रही है। लंबे समय तक बैठे रहने से हड्डियों को वह प्राकृतिक स्टिम्युलेशन नहीं मिल पाता जो उन्हें मजबूत बनाए रखने के लिए जरूरी होता है।
चलना, सीढ़ियां चढ़ना, हल्का व्यायाम या वजन उठाने जैसी गतिविधियां हड्डियों को मजबूत रहने का संकेत देती हैं। लेकिन जब शरीर लंबे समय तक निष्क्रिय रहता है, तो हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं।
इसके अलावा आजकल की डाइटिंग संस्कृति भी समस्या को बढ़ा रही है। कई लोग तेजी से वजन घटाने के लिए कम कैलोरी वाली डाइट, क्रैश डाइट या भोजन छोड़ने जैसी आदतें अपनाते हैं। इससे शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते।
हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम, विटामिन D और प्रोटीन बेहद जरूरी होते हैं। National Institute of Nutrition की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बड़ी संख्या में युवाओं की डाइट में पर्याप्त कैल्शियम नहीं होता।
क्रैश डाइट शरीर से जरूरी पोषक तत्व छीन लेती है, जिसके कारण शरीर को हड्डियों में जमा कैल्शियम और मिनरल्स का इस्तेमाल करना पड़ता है। इससे समय के साथ हड्डियों की मजबूती कम होने लगती है।
World Health Organization यानी WHO ने भी चेतावनी दी है कि आधुनिक जीवनशैली से जुड़े कई कारक हड्डियों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि तनाव भी हड्डियों की कमजोरी से जुड़ा हुआ है। लगातार तनाव में रहने से शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो लंबे समय में हड्डियों को नुकसान पहुंचा सकता है।
नींद की कमी भी एक बड़ा कारण बन रही है। जब हम सोते हैं, तब शरीर खुद को रिपेयर करता है और ऊतकों का पुनर्निर्माण होता है। लेकिन देर रात तक जागना, लगातार स्क्रीन देखना और अनियमित नींद की आदतें इस प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं।
आज शहरों में रहने वाले अधिकांश लोग दिनभर में मुश्किल से कुछ मिनट ही प्राकृतिक धूप में बिताते हैं। कई लोग सिर्फ खिड़कियों से आने वाली धूप को पर्याप्त मान लेते हैं, जबकि विशेषज्ञों के अनुसार सीधी धूप में रोज 15 से 20 मिनट बिताना शरीर के लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है।
डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय रहते लाइफस्टाइल में बदलाव नहीं किए गए, तो आने वाले वर्षों में कम उम्र में हड्डियों से जुड़ी समस्याएं और तेजी से बढ़ सकती हैं।

