भारत की गणितीय प्रतिभाओं की बात होती है, तो Shakuntala Devi का नाम सबसे पहले लिया जाता है। उन्हें दुनिया भर में “ह्यूमन कंप्यूटर” के नाम से जाना जाता था। उनकी मानसिक गणना करने की क्षमता इतनी तेज थी कि वह बड़े से बड़े कठिन सवालों को भी कुछ ही सेकंड में हल कर देती थीं—वह भी बिना किसी कैलकुलेटर या कागज-कलम के।
अद्भुत गणितीय क्षमता
शकुंतला देवी के कारनामे आज भी लोगों को हैरान कर देते हैं। कहा जाता है कि वह दो रैंडम 13 अंकों वाली संख्याओं को कुछ ही सेकंड में गुणा कर सकती थीं। इतना ही नहीं, उन्होंने एक बार 201 अंकों की संख्या का 23वां रूट भी एक मिनट से कम समय में निकाल दिया था।
उनकी इस असाधारण प्रतिभा के कारण उनका नाम Guinness World Records में भी दर्ज किया गया। उस समय जब कंप्यूटर भी इतनी तेजी से गणना नहीं कर पाते थे, शकुंतला देवी अपने दिमाग से ही जटिल गणितीय सवाल हल कर देती थीं।
बचपन में ही दिखी प्रतिभा
शकुंतला देवी की यह अनोखी क्षमता बचपन से ही नजर आने लगी थी। खास बात यह है कि उन्होंने कभी औपचारिक शिक्षा (formal education) प्राप्त नहीं की। इसके बावजूद उनकी गणितीय समझ इतनी गहरी थी कि बड़े-बड़े गणितज्ञ भी उनसे प्रभावित हो जाते थे।
जब उन्हें कोई तारीख दी जाती थी, तो वह तुरंत बता देती थीं कि वह कौन सा दिन होगा। यह क्षमता आज भी आम लोगों के लिए चमत्कार जैसी लगती है।
पिता ने पहचानी प्रतिभा
रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके पिता—जो सर्कस में ट्रैपीज आर्टिस्ट थे—ने सबसे पहले अपनी बेटी की इस खास प्रतिभा को पहचाना। एक दिन जब वह अपनी तीन साल की बेटी के साथ ताश खेल रहे थे, तो उन्होंने देखा कि शकुंतला देवी उन्हें चालाकी से नहीं, बल्कि पत्तों को याद रखकर हरा रही हैं।
यहीं से उन्हें एहसास हुआ कि उनकी बेटी में कुछ असाधारण है। इसके बाद उन्होंने शकुंतला देवी की प्रतिभा को दुनिया के सामने लाने का फैसला किया।
बाल प्रतिभा से बनी विश्व प्रसिद्ध हस्ती
सिर्फ छह साल की उम्र में शकुंतला देवी ने कर्नाटक के एक विश्वविद्यालय में सार्वजनिक कार्यक्रम में अपनी गणितीय क्षमता का प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्हें “बाल प्रतिभा” के रूप में पहचान मिलने लगी।
समय के साथ उन्होंने भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में अपने टैलेंट का प्रदर्शन किया। उनका उद्देश्य केवल अपनी प्रतिभा दिखाना ही नहीं था, बल्कि लोगों के मन से गणित का डर दूर करना भी था।
कैसे मिला ‘ह्यूमन कंप्यूटर’ का खिताब
1950 के दशक में BBC लंदन के एक इंटरव्यू के दौरान शकुंतला देवी से एक कठिन गणितीय सवाल पूछा गया। उन्होंने न केवल उस सवाल का जवाब दिया, बल्कि यह भी बताया कि कंप्यूटर द्वारा दिया गया सवाल ही गलत है।
शुरुआत में किसी ने उनकी बात पर विश्वास नहीं किया, लेकिन अगले दिन जब उनकी बात सही साबित हुई, तो दुनिया ने उनकी प्रतिभा को सलाम किया। इसी घटना के बाद उन्हें “ह्यूमन कंप्यूटर” का खिताब मिला।
समाज और शिक्षा के लिए योगदान
शकुंतला देवी केवल गणित तक सीमित नहीं थीं। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में भी योगदान दिया और छात्रों को गणित को आसान तरीके से समझाने की कोशिश की। उनका मानना था कि गणित एक डरावना विषय नहीं, बल्कि एक मजेदार और रोचक विषय है।
उनके नाम पर चलने वाले शिक्षा ट्रस्ट के माध्यम से भी छात्रों को प्रेरित किया गया कि वे गणित को अपनाएं और उससे डरें नहीं।
राजनीति में भी आजमाई किस्मत
कम ही लोग जानते हैं कि शकुंतला देवी ने राजनीति में भी कदम रखा था। उन्होंने 1980 के लोकसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में हिस्सा लिया। उस समय उनका मुकाबला Indira Gandhi जैसी दिग्गज नेता से था।
हालांकि चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली और वह 9वें स्थान पर रहीं, लेकिन यह कदम उनके आत्मविश्वास और साहस को दर्शाता है।
एक प्रेरणादायक जीवन
शकुंतला देवी का जीवन इस बात का उदाहरण है कि प्रतिभा किसी डिग्री की मोहताज नहीं होती। बिना औपचारिक शिक्षा के भी उन्होंने दुनिया भर में भारत का नाम रोशन किया।
आज भी उन्हें एक ऐसी महिला के रूप में याद किया जाता है, जिसने अपनी अद्भुत क्षमता से दुनिया को चौंका दिया और यह साबित किया कि इंसान का दिमाग किसी भी मशीन से कम नहीं है।

