Fatty liver symptoms: भारत में मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोगों के बीच एक और गंभीर स्वास्थ्य समस्या तेजी से उभर रही है—नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD)। PIB की 2024 रिपोर्ट के अनुसार, देश की लगभग 35–38% आबादी फैटी लिवर से प्रभावित है। यह बीमारी अक्सर बिना किसी शोर-शराबे के शरीर में विकसित होती रहती है, इसलिए लोग इसे समझ ही नहीं पाते।
गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी (MD, MPH) ने अपने एक वीडियो में बताया कि कई शुरुआती संकेत ऐसे होते हैं जो देखने में मामूली लगते हैं, लेकिन वास्तव में ये फैटी लिवर की शुरुआत का संकेत होते हैं। इन्हें अनदेखा करना आगे चलकर गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।
1. लगातार थकान जो आराम से भी दूर न हो
फैटी लिवर के कारण होने वाली थकान सामान्य थकान से अलग होती है। जब लिवर में अधिक चर्बी जमा हो जाती है, तो वह पोषक तत्वों को ऊर्जा में बदलने की क्षमता खोने लगता है।
इसके कारण:
-
दिनभर सुस्ती
-
एनर्जी लेवल में गिरावट
-
शरीर में भारीपन
2. पेट और कमर पर बढ़ती चर्बी
यदि शरीर का बाकी हिस्सा सामान्य दिखे, लेकिन पेट और कमर का घेरा धीरे-धीरे बढ़ रहा हो, तो यह इंसुलिन रेजिस्टेंस और फैटी लिवर का स्पष्ट संकेत हो सकता है। यह बताता है कि अंगों के आसपास फैट जमा होना शुरू हो गया है।
3. दाईं पसलियों के नीचे हल्का दर्द या भारीपन
दाईं ओर पसलियों के नीचे हल्का दर्द, दबाव या भारीपन महसूस होना लिवर की सूजन का संकेत हो सकता है। यह दर्द बहुत तेज नहीं होता, बल्कि धीमी असहजता की तरह महसूस होता है।
4. इंसुलिन रेजिस्टेंस के छिपे संकेत
फैटी लिवर का नजदीकी संबंध इंसुलिन रेजिस्टेंस से है। इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं—
-
खाने के तुरंत बाद भूख लगना
-
अचानक से एनर्जी का गिर जाना
-
गर्दन और बगल की त्वचा का काला पड़ना
ये संकेत शरीर में बिगड़ते शुगर कंट्रोल की ओर इशारा करते हैं और भविष्य में डायबिटीज का खतरा बढ़ा सकते हैं।
5. मतली, भूख कम लगना या जल्दी पेट भर जाना
लिवर में अधिक चर्बी जमा होने पर, शरीर टॉक्सिन्स और फैट को ठीक से प्रोसेस नहीं कर पाता। इसके कारण—
-
खाने में अरुचि
-
पेट में गड़बड़ी
-
थोड़े से खाने में ही पेट भरना
ये बदलाव बताते हैं कि शरीर अंदरूनी स्तर पर संघर्ष कर रहा है।
❗यदि ऐसे संकेत दिखें, तो डॉक्टर से जरूर मिलें
इनमें से कोई भी लक्षण नजर आने पर इसे नजरअंदाज़ न करें। यह फैटी लिवर डिजीज का शुरुआती चरण हो सकता है। सही समय पर जांच और इलाज से बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है।

