लीची में स्टिंक बग का खतरा: 80% तक फसल बर्बाद कर सकता है कीट, जानें बचाव के उपाय

Lichi Stink Bug
Lichi Stink Bug

Lichi Stink Bug: गर्मी की दस्तक के साथ ही बाजारों में मीठी और रसीली लीची की चर्चा शुरू हो जाती है। हालांकि इस समय बाजार में फल भले न पहुंचे हों, लेकिन बागानों में लीची के पेड़ों पर मंजर यानी फूल आ चुके हैं। यही वह संवेदनशील समय होता है जब किसानों को खास सतर्कता बरतनी पड़ती है। फरवरी से अप्रैल के बीच लीची की फसल पर स्टिंक बग नामक खतरनाक कीट का खतरा काफी बढ़ जाता है। मौसम में अचानक बदलाव और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण यह कीट तेजी से सक्रिय हो जाता है और पेड़ों पर हमला बोल देता है।

स्टिंक बग लीची की फसल के लिए बेहद घातक माना जाता है। यदि समय रहते इसका नियंत्रण नहीं किया गया तो यह कीट फल को काला कर देता है, जिससे न तो फल बाजार के लायक बचता है और न ही उससे रस तैयार किया जा सकता है। इसी गंभीर खतरे को देखते हुए बिहार कृषि विभाग ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है, जिसमें स्टिंक बग से बचाव के व्यावहारिक उपाय बताए गए हैं।

इन जिलों में अधिक खतरा

पिछले कुछ वर्षों में लीची उत्पादन वाले प्रमुख जिलों में इस कीट का असर ज्यादा देखा गया है। खासकर मुजफ्फरपुर और पूर्वी चम्पारण के कई प्रखंडों में स्टिंक बग का प्रकोप सामने आया है। इन इलाकों में लीची बड़े पैमाने पर उगाई जाती है, इसलिए यहां के किसानों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

स्टिंक बग के लक्षण पहचानें

स्टिंक बग गुलाबी या भूरे रंग का बदबूदार कीट होता है, जो अक्सर झुंड में हमला करता है। इसके नवजात और वयस्क दोनों ही रूप फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। यह कीट पेड़ों की कोमल कलियों, नई पत्तियों, फूलों, विकसित हो रहे फलों, फलों के डंठल और नाजुक शाखाओं से रस चूसता है।

रस चूसने के बाद फल काले पड़ने लगते हैं और धीरे-धीरे सूखकर गिर जाते हैं। यदि संक्रमण ज्यादा बढ़ जाए तो पूरी फसल प्रभावित हो सकती है। किसान यदि समय पर लक्षण पहचान लें तो बड़े नुकसान से बचा जा सकता है।

कितना होता है नुकसान?

विशेषज्ञों के अनुसार फरवरी से 15 अप्रैल तक यह कीट सबसे अधिक सक्रिय रहता है। स्टिंक बग को लीची का सबसे बड़ा दुश्मन कीट माना जाता है। यदि एक भी पेड़ पर कुछ कीट बच जाएं तो वे तेजी से अपनी संख्या बढ़ा लेते हैं और पूरे बाग को संक्रमित कर सकते हैं।

अनियंत्रित स्थिति में यह कीट लीची की फसल को 80 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में नियमित निगरानी और सामूहिक नियंत्रण बेहद जरूरी है।

बचाव के प्रभावी उपाय

कृषि विशेषज्ञों द्वारा बताए गए उपाय अपनाकर किसान इस कीट पर काबू पा सकते हैं:

  1. संक्रमित भागों की छंटाई: जिन पत्तियों और टहनियों पर कीट दिखाई दें, उन्हें काटकर तुरंत जला दें।

  2. सुबह के समय झटका विधि: सुबह पेड़ की शाखाओं को हल्के से हिलाएं, जिससे कीट नीचे गिर जाएं। गिरे हुए कीटों को इकट्ठा कर मिट्टी में दबाकर नष्ट कर दें।

  3. रासायनिक नियंत्रण: राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र द्वारा सुझाए गए कीटनाशकों का दो बार छिड़काव 15 दिन के अंतराल पर करें।

    • वियाक्लोप्रिड 21.7% एस.सी. (0.5 मिली प्रति लीटर पानी)

    • लैम्डासायहॅलोथ्रिन 5% ई.सी. (1.0 मिली प्रति लीटर)

    • फिप्रोनिल 5% एस.सी. (1.5 मिली प्रति लीटर)

छिड़काव हमेशा सुबह या शाम के समय करें और सुरक्षा उपकरणों का उपयोग अवश्य करें।

निष्कर्ष

लीची की फसल के लिए यह समय बेहद संवेदनशील है। थोड़ी सी लापरवाही किसानों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है। नियमित निरीक्षण, समय पर छिड़काव और संक्रमित हिस्सों को हटाने जैसे उपाय अपनाकर स्टिंक बग से फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है। यदि किसान सजग रहें और विभागीय सलाह का पालन करें तो मीठी और स्वस्थ लीची की अच्छी पैदावार सुनिश्चित की जा सकती है।