Nuclear Test Warning: दुनिया एक बार फिर परमाणु तनाव के दौर में प्रवेश करती नजर आ रही है। अमेरिका की ओर से परमाणु परीक्षण दोबारा शुरू करने के संकेत मिलने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। वियना में हुई एक अहम बैठक के दौरान अमेरिकी राजनयिक के बयान ने वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं।
समग्र परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि संगठन (CTBTO) की बैठक में अंतरराष्ट्रीय संगठनों के लिए अमेरिका के प्रभारी हावर्ड सोलोमन ने कहा कि अमेरिका अन्य परमाणु शक्ति संपन्न देशों के “समान स्तर” पर अपनी परीक्षण गतिविधियों पर विचार कर सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी कदम में पारदर्शिता और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।
सोलोमन ने आरोप लगाया कि रूस और चीन वर्ष 2019 से शून्य-उपज (Zero Yield) परमाणु परीक्षण प्रतिबंध का उल्लंघन कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने उत्तर कोरिया का भी जिक्र किया, जिसने इस सदी में अब तक छह परमाणु परीक्षण किए हैं। उनके अनुसार बेहद कम शक्ति वाले भूमिगत परमाणु परीक्षणों का पता लगाना वैश्विक निगरानी प्रणालियों के लिए भी चुनौतीपूर्ण है।
हालांकि रूस और चीन दोनों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। रूस के प्रतिनिधि मिखाइल उल्यानोव ने चेतावनी दी कि यदि परमाणु परीक्षणों को फिर से शुरू किया गया तो इससे वैश्विक सुरक्षा और परमाणु अप्रसार व्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने अमेरिका से अपने रुख को स्पष्ट करने की मांग भी की।
इसके जवाब में अमेरिका ने रूस पर न्यू स्टार्ट संधि के उल्लंघन और बड़ी संख्या में गैर-रणनीतिक परमाणु हथियार रखने का आरोप लगाया। विशेषज्ञों के अनुसार ये हथियार युद्धक्षेत्र में उपयोग के लिए बनाए जाते हैं, जिससे इनके इस्तेमाल की संभावना कहीं अधिक होती है।
गौरतलब है कि अमेरिका और रूस के बीच न्यू स्टार्ट संधि 5 फरवरी को समाप्त होने जा रही है। यदि इसे आगे नहीं बढ़ाया गया, तो दशकों बाद पहली बार दोनों देशों के परमाणु हथियारों पर कोई कानूनी सीमा नहीं बचेगी। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि दुनिया एक बार फिर खतरनाक परमाणु हथियारों की दौड़ की ओर बढ़ सकती है।

