US Pilot Rescue Mission: ईरान में ऑपरेशन पर बड़ा दावा, ‘दुनिया की कोई सेना नहीं कर सकती ऐसा’

US Pilot Rescue Mission
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US Pilot Rescue Mission: हाल ही में ईरान में हुए एक साहसिक सैन्य ऑपरेशन को लेकर अमेरिका के पूर्व पेंटागन अधिकारी माइकल रुबिन का बयान चर्चा में है। उन्होंने इस मिशन को अमेरिकी सैन्य क्षमता का शानदार उदाहरण बताते हुए कहा कि दुनिया की कोई दूसरी सेना इस स्तर का ऑपरेशन अंजाम नहीं दे सकती। उनके मुताबिक, यह घटना न केवल अमेरिका की ताकत को दर्शाती है, बल्कि ईरान की सैन्य क्षमता पर भी सवाल खड़े करती है।

यह पूरा मामला 3 अप्रैल को सामने आया, जब ईरान ने एक अमेरिकी F-15 लड़ाकू विमान को मार गिराने का दावा किया। इस घटना के बाद स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई थी। हालांकि, अमेरिका ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए अपने पायलट को बचाने के लिए एक हाई-रिस्क रेस्क्यू मिशन शुरू किया। इस मिशन में कई अत्याधुनिक लड़ाकू विमान और विशेष बलों को शामिल किया गया।

दुश्मन के इलाके में घुसकर किया रेस्क्यू

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह ऑपरेशन बेहद जटिल और जोखिम भरा था, क्योंकि इसे दुश्मन के इलाके के भीतर अंजाम दिया गया। इसके बावजूद अमेरिकी सेना ने सटीक योजना और तेज कार्रवाई के जरिए पायलट को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस मिशन ने दुनिया भर के सैन्य विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है।

माइकल रुबिन ने इस ऑपरेशन की तारीफ करते हुए कहा कि यह दिखाता है कि अमेरिका किसी भी परिस्थिति में अपने सैनिकों को बचाने के लिए कितनी दूर तक जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की क्षमता हर देश के पास नहीं होती, और यही अमेरिका को बाकी देशों से अलग बनाती है।

ईरान पर तीखा हमला

रुबिन ने अपने बयान में ईरान की सैन्य ताकत को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन साबित करता है कि ईरान की ताकत केवल दिखावे तक सीमित है। उन्होंने ईरान को “कागजी शेर” बताते हुए कहा कि वास्तविक युद्धक्षमता के मामले में वह अमेरिका के सामने कहीं नहीं टिकता।

उनके अनुसार, यह मिशन इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अमेरिका दुश्मन के क्षेत्र में भी सटीक और तेज कार्रवाई करने में सक्षम है। इससे न केवल ईरान बल्कि अन्य देशों को भी एक स्पष्ट संदेश गया है।

भारत के लिए भी दी सलाह

माइकल रुबिन ने इस मुद्दे पर भारत को भी सलाह दी। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत एक वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है, उसे अपनी सैन्य क्षमता को और मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में भारत को पाकिस्तान और चीन जैसे देशों से बढ़ते खतरे का सामना करना पड़ सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि केवल अंतरराष्ट्रीय कानून और कूटनीति पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। भारत को अपनी रक्षा प्रणाली को और अधिक आधुनिक और सक्षम बनाना होगा, ताकि वह किसी भी चुनौती का सामना कर सके।

तुर्की कनेक्शन से बढ़ी चिंता

इस पूरे मामले में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस मिसाइल से अमेरिकी F-15 विमान को गिराया गया, वह संभवतः तुर्की द्वारा उपलब्ध कराई गई हो सकती है। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो यह नाटो (NATO) के भीतर गंभीर मतभेद पैदा कर सकता है।

तुर्की, जो कि नाटो का सदस्य है, अगर इस तरह की गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो यह गठबंधन के लिए बड़ा झटका हो सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नए तनाव पैदा होने की संभावना है।