अमेरिकी रिपोर्ट का दावा: चीन की परमाणु मिसाइलों में फ्यूल की जगह पानी

China Nuclear Missiles
China Nuclear Missiles

China Nuclear Missiles: चीन की सैन्य ताकत और परमाणु क्षमता को लेकर एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की कुछ परमाणु मिसाइलों में ईंधन (फ्यूल) की जगह पानी भरा हुआ था, जिससे वे तकनीकी रूप से तैनात होने के बावजूद लॉन्च करने योग्य नहीं थीं। रिपोर्ट के अनुसार, ये मिसाइलें पश्चिमी चीन के शिनजियांग प्रांत में स्थित चीनी रॉकेट फोर्स के एक अत्यंत गोपनीय सैन्य ठिकाने पर तैनात थीं।

अमेरिकी रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस गंभीर चूक और कथित भ्रष्टाचार का खुलासा होने के बाद ही चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सेना के भीतर बड़े स्तर पर सफाई अभियान शुरू किया। इसी कड़ी में चीनी रॉकेट फोर्स के शीर्ष अधिकारी और राष्ट्रपति के करीबी माने जाने वाले जनरल झांग यूक्सिया को उनके पद से हटा दिया गया। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब चीन अपनी परमाणु और मिसाइल क्षमताओं को तेजी से विस्तार देने का दावा करता रहा है।

कौन थे जनरल झांग यूक्सिया

जनरल झांग यूक्सिया चीन के सबसे प्रभावशाली सैन्य अधिकारियों में शामिल थे। वे चीन के केंद्रीय सैन्य आयोग (Central Military Commission) में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बाद दूसरे सबसे वरिष्ठ सदस्य थे। यह आयोग पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA), पीपुल्स आर्म्ड पुलिस और मिलिशिया की कमान संभालता है। चीन की सैन्य रणनीति, हथियार विकास और परमाणु नीति से जुड़े अहम फैसले इसी आयोग के तहत लिए जाते हैं।

अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के गंभीर आरोप

अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जनरल झांग यूक्सिया को 19 जनवरी को हिरासत में लिया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने चीन के परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़ी संवेदनशील जानकारी अमेरिका को लीक की, पदोन्नति के बदले रिश्वत ली और पीएलए की युद्ध तैयारी को कमजोर किया। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने PLA डेली में प्रकाशित एक लेख के हवाले से लिखा कि भ्रष्टाचार ने चीन की सैन्य क्षमता को अंदर से खोखला किया है और ऐसे अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है, जो हथियार प्रणालियों और सैन्य बजट में हेरफेर करते हैं।

शिनजियांग मिसाइल ठिकाना और ‘पानी’ का दावा

ब्लूमबर्ग की 2024 की एक रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया था कि शिनजियांग में स्थित मिसाइल साइलो पर ऐसे ढक्कन लगाए गए थे, जो आपात स्थिति में भी लॉन्च को रोक सकते थे। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि कुछ मिसाइलों में फ्यूल की जगह पानी भरा हुआ था, जिससे वे केवल कागजों में तैनात दिखाई देती थीं, लेकिन असल में उपयोग के लायक नहीं थीं।

विशेषज्ञों में मतभेद

हालांकि, इन दावों को लेकर सभी रक्षा विशेषज्ञ सहमत नहीं हैं। सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) का कहना है कि यदि कुछ मिसाइलों में अस्थायी रूप से पानी भरा भी गया हो, तो इसे चीन की समग्र परमाणु क्षमता का स्थायी संकेत नहीं माना जा सकता। वहीं, एशिया टाइम्स ने ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि चीन आमतौर पर अपनी लिक्विड-फ्यूल मिसाइलों में पहले से प्रोपेलेंट नहीं भरता, ऐसे में पानी भरने का दावा तर्कसंगत नहीं लगता—जब तक कि यह जानबूझकर किया गया कृत्य न हो।

शी जिनपिंग का सैन्य ‘क्लीन-अप’ अभियान

विश्लेषकों का मानना है कि हाल के वर्षों में चीनी सेना के कई वरिष्ठ अधिकारियों की बर्खास्तगी इस बात का संकेत है कि शी जिनपिंग सेना में फैले भ्रष्टाचार को खत्म कर वास्तविक युद्ध क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। रॉकेट फोर्स में की गई कार्रवाई को चीन की परमाणु रणनीति के लिहाज से अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। फिलहाल, चीनी सरकार ने इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन वैश्विक स्तर पर इस रिपोर्ट ने चीन की सैन्य पारदर्शिता और परमाणु तैयारियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।