अमेरिका के विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से अलग होने के फैसले पर अब संगठन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आ गई है। WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम गेब्रेयेसस ने अमेरिका के कदम को लेकर गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि इस फैसले से न केवल अमेरिका, बल्कि पूरी दुनिया की स्वास्थ्य सुरक्षा पर असर पड़ेगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका द्वारा बताए गए कारण वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाते और कई अहम उपलब्धियों को नजरअंदाज करते हैं।
डॉ. टेड्रोस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबा बयान जारी करते हुए याद दिलाया कि अमेरिका WHO का संस्थापक सदस्य रहा है और दशकों तक संगठन के साथ मिलकर वैश्विक स्वास्थ्य संकटों से लड़ता रहा है। उन्होंने कहा कि WHO की ऐतिहासिक सफलताओं में अमेरिका की भूमिका बेहद अहम रही है, चाहे वह चेचक का पूरी तरह उन्मूलन हो या पोलियो, HIV, इबोला, इन्फ्लुएंजा, टीबी और मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारियों के खिलाफ वैश्विक अभियान।
WHO की आपत्ति और चिंता
WHO प्रमुख ने कहा, “अमेरिका के WHO से हटने से दुनिया कम सुरक्षित हो जाती है।” उनके मुताबिक, वैश्विक स्वास्थ्य संकट किसी एक देश तक सीमित नहीं रहते। बीमारियां सीमाओं को नहीं मानतीं और ऐसे में अंतरराष्ट्रीय सहयोग ही सबसे मजबूत हथियार होता है। अमेरिका जैसे बड़े और संसाधन संपन्न देश का संगठन से बाहर जाना वैश्विक समन्वय को कमजोर करता है।
डॉ. टेड्रोस ने यह भी स्पष्ट किया कि WHO हमेशा सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान करता आया है और अमेरिका के साथ भी यही रवैया अपनाया गया। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में अमेरिका दोबारा WHO के साथ सक्रिय रूप से जुड़ सकता है और वैश्विक स्वास्थ्य प्रयासों में अपनी भूमिका निभाएगा।
By withdrawing from @who and its global efforts to combat polio, ebola and cervical cancer, the US is effectively siding with viruses and bacteria against modern medicine. https://t.co/iCKwPBqYQu
— Nicholas Kristof (@NickKristof) January 24, 2026
COVID-19 को लेकर लगाए गए आरोपों पर जवाब
अमेरिका ने WHO पर COVID-19 महामारी के दौरान विफल रहने, अहम जानकारियां छिपाने और गलत दिशा-निर्देश देने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए WHO ने कहा कि महामारी के शुरुआती दौर से ही संगठन ने पारदर्शिता के साथ जानकारी साझा की थी। WHO ने मास्क पहनने, वैक्सीनेशन और सामाजिक दूरी जैसे उपायों की सलाह जरूर दी, लेकिन लॉकडाउन या वैक्सीन को अनिवार्य बनाने की सिफारिश कभी नहीं की।
WHO का कहना है कि महामारी से निपटने के लिए अंतिम फैसले हमेशा संबंधित देशों की सरकारों पर छोड़े गए। संगठन ने यह भी माना कि किसी भी वैश्विक संकट में पूरी तरह त्रुटिरहित काम संभव नहीं होता, लेकिन WHO ने COVID-19 के दौरान अपने दायित्व ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ निभाए।
अमेरिका का आधिकारिक रुख
22 जनवरी को अमेरिका ने औपचारिक रूप से WHO से बाहर निकलने की घोषणा कर दी। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और स्वास्थ्य मंत्री केनेडी ने कहा कि आगे WHO के साथ अमेरिका का संपर्क केवल निकासी प्रक्रिया और विदेशों में मौजूद अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े मामलों तक सीमित रहेगा। इस फैसले के साथ ही अमेरिका और WHO के रिश्तों में दशकों पुराना सहयोग खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है।
आगे की राह क्या होगी
WHO ने दोहराया है कि वह अमेरिका के फैसले के बावजूद अपने वैश्विक मिशन पर कायम रहेगा। संगठन का कहना है कि वह सभी देशों के साथ मिलकर काम करता रहेगा और उसका लक्ष्य है हर व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना। WHO के अनुसार, स्वास्थ्य एक मौलिक मानव अधिकार है और किसी एक देश के अलग होने से यह उद्देश्य नहीं बदलेगा।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के बाहर जाने से WHO की फंडिंग, रिसर्च और आपातकालीन स्वास्थ्य प्रतिक्रिया पर असर पड़ सकता है। ऐसे समय में जब दुनिया नए-नए वायरस और स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रही है, वैश्विक सहयोग की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा महसूस की जा रही है।
अमेरिका और WHO के बीच यह दूरी आने वाले वर्षों में वैश्विक स्वास्थ्य राजनीति को किस दिशा में ले जाएगी, यह तो समय ही बताएगा। फिलहाल WHO ने दरवाजे खुले रखने का संकेत दिया है और उम्मीद जताई है कि भविष्य में अमेरिका फिर से इस वैश्विक मंच का हिस्सा बनेगा।

