UN Secretary General: दुनिया के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय संगठन United Nations (UN) में इस बार इतिहास रचने की संभावना बन रही है। आगामी महासचिव (Secretary-General) के चुनाव में पहली बार ऐसी स्थिति बनी है जब महिला उम्मीदवारों को लेकर वैश्विक स्तर पर मजबूत समर्थन देखने को मिल रहा है। कुल चार उम्मीदवार इस दौड़ में शामिल हैं, जिनमें दो महिलाएं भी हैं—और यही बात इस चुनाव को बेहद खास बना रही है।
UN के 80 साल के इतिहास में अब तक किसी महिला को महासचिव बनने का मौका नहीं मिला है। ऐसे में इस बार उम्मीद जताई जा रही है कि यह परंपरा टूट सकती है और संगठन को पहली महिला प्रमुख मिल सकती है।
चुनाव प्रक्रिया शुरू होने जा रही है
संयुक्त राष्ट्र के अगले महासचिव के चुनाव की प्रक्रिया इसी महीने से शुरू होगी। सभी उम्मीदवार 21 और 22 अप्रैल को न्यूयॉर्क स्थित UN मुख्यालय में आयोजित संवाद सत्रों में भाग लेंगे। इन सत्रों में उम्मीदवारों से वैश्विक मुद्दों, नेतृत्व क्षमता और उनकी नीतियों को लेकर सवाल-जवाब किए जाएंगे।
वर्तमान महासचिव Antonio Guterres दिसंबर 2026 में अपना दूसरा कार्यकाल पूरा करेंगे। उन्होंने 2017 में पद संभाला था और इससे पहले पुर्तगाल के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। उनके कार्यकाल के बाद अब नए नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
कौन हैं प्रमुख दावेदार?
इस बार महासचिव पद के लिए चार प्रमुख उम्मीदवार सामने आए हैं:
- Michelle Bachelet – चिली की पूर्व राष्ट्रपति और UN मानवाधिकार उच्चायुक्त रह चुकी हैं।
- Rebeca Grynspan – कोस्टा रिका की पूर्व उपराष्ट्रपति और वर्तमान में UN व्यापार एवं विकास सम्मेलन (UNCTAD) की प्रमुख।
- Rafael Grossi – अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख।
- Macky Sall – सेनेगल के पूर्व राष्ट्रपति।
इनमें से बैचलेट और ग्रिन्स्पैन महिला उम्मीदवार हैं, जिन पर इस बार खास ध्यान दिया जा रहा है। कई देशों और संगठनों का मानना है कि अब समय आ गया है कि UN का नेतृत्व एक महिला के हाथों में हो।
महिलाओं के पक्ष में बढ़ती मांग
पिछले साल UN महासभा में पारित एक प्रस्ताव में इस बात पर खेद जताया गया था कि अब तक कोई महिला महासचिव नहीं बनी। इसके साथ ही सदस्य देशों से अधिक महिला उम्मीदवारों को आगे लाने की अपील की गई थी।
इसके अलावा “Women SG” और “1 for 8 Billion” जैसे वैश्विक अभियान भी लगातार इस मांग को मजबूत कर रहे हैं। उनका मानना है कि यह सिर्फ लैंगिक समानता का मुद्दा नहीं है, बल्कि UN की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता से भी जुड़ा हुआ है।
इन अभियानों का कहना है कि दुनिया की आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने के लिए नेतृत्व में भी समान भागीदारी जरूरी है।
कैसे होता है महासचिव का चयन?
महासचिव का चयन सीधे तौर पर 193 सदस्य देशों वाली UN महासभा द्वारा किया जाता है, लेकिन इसके लिए United Nations Security Council (UNSC) की सिफारिश जरूरी होती है।
सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य—चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका—इस प्रक्रिया में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं क्योंकि उनके पास वीटो शक्ति होती है। यानी यदि इनमें से कोई भी देश किसी उम्मीदवार का विरोध करता है, तो उसकी दावेदारी खत्म हो सकती है।
इसी वजह से महासचिव का चुनाव सिर्फ योग्यता ही नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति और कूटनीति का भी बड़ा खेल होता है।
क्या बदलेगा इतिहास?
इस बार के चुनाव को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या UN को उसकी पहली महिला महासचिव मिलेगी?
अगर ऐसा होता है, तो यह न सिर्फ एक ऐतिहासिक कदम होगा, बल्कि यह दुनिया भर में लैंगिक समानता के लिए एक मजबूत संदेश भी देगा।
महिला नेतृत्व को लेकर बढ़ती जागरूकता और वैश्विक समर्थन को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि इस बार बदलाव संभव है। हालांकि अंतिम फैसला सुरक्षा परिषद और महासभा की सहमति पर निर्भर करेगा।
UN महासचिव का यह चुनाव सिर्फ एक पद का चयन नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक अवसर है। यह तय करेगा कि क्या दुनिया का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय संगठन अपने 80 साल पुराने इतिहास को बदलने के लिए तैयार है या नहीं।
अब सबकी नजरें इस प्रक्रिया पर टिकी हैं—क्योंकि इस बार परिणाम सिर्फ नेतृत्व नहीं, बल्कि इतिहास भी तय करेगा।

