Chinese Spy Network: ब्रिटेन और चीन के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। लंदन की अदालत द्वारा दो लोगों को चीन के लिए जासूसी करने का दोषी ठहराए जाने के बाद ब्रिटेन सरकार ने चीन के राजदूत Zheng Zeguang को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। इस मामले ने न सिर्फ दोनों देशों के रिश्तों में नई दरार पैदा कर दी है, बल्कि विदेशी जासूसी और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि देश के भीतर किसी विदेशी सरकार द्वारा निगरानी, धमकी या हस्तक्षेप की कोशिश उसकी संप्रभुता का उल्लंघन है और इसे बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार का कहना है कि लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
अदालत ने दो लोगों को ठहराया दोषी
लंदन की सेंट्रल क्रिमिनल कोर्ट ने वाई ची-लेउंग और युएन चुंग-बियू नाम के दो लोगों को चीन की ओर से जासूसी करने का दोषी पाया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक दोनों आरोपी ब्रिटेन में रह रहे हांगकांग समर्थक लोकतंत्र कार्यकर्ताओं की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे और उनकी जानकारी चीन तक पहुंचा रहे थे।
बताया गया है कि वाई ची-लेउंग पहले ब्रिटेन के इमिग्रेशन विभाग में काम कर चुका था। वह हीथ्रो एयरपोर्ट पर ब्रिटिश बॉर्डर फोर्स में तैनात था और इसी दौरान उसने सरकारी डेटाबेस का गलत इस्तेमाल कर कई लोगों की निजी जानकारी हासिल की।
जांच एजेंसियों का दावा है कि आरोपियों ने संवेदनशील सूचनाएं इकट्ठा कर उन्हें उन लोगों तक पहुंचाया जो हांगकांग सरकार और बीजिंग से जुड़े हुए थे।
हांगकांग समर्थकों पर रखी जा रही थी नजर
ब्रिटिश अधिकारियों के अनुसार, इस कथित जासूसी नेटवर्क का मुख्य उद्देश्य ब्रिटेन में शरण लिए हांगकांग लोकतंत्र समर्थकों की निगरानी करना था। रिपोर्ट्स के मुताबिक कई कार्यकर्ताओं की गतिविधियों पर लंबे समय से नजर रखी जा रही थी।
इनमें प्रमुख लोकतंत्र समर्थक नेता Nathan Law का नाम भी सामने आया है। नाथन लॉ चीन विरोधी आवाजों में प्रमुख माने जाते हैं और हांगकांग में लोकतंत्र समर्थक आंदोलन का बड़ा चेहरा रहे हैं। बताया जा रहा है कि उनकी गतिविधियों की कई वर्षों तक निगरानी की गई।
इस खुलासे के बाद ब्रिटेन में रह रहे कई हांगकांग समर्थक कार्यकर्ताओं के बीच चिंता बढ़ गई है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि विदेशों में रह रहे राजनीतिक कार्यकर्ताओं को निशाना बनाना बेहद गंभीर मामला है।
ब्रिटेन ने जताई कड़ी नाराजगी
ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने चीन के राजदूत को बुलाकर स्पष्ट संदेश दिया कि ब्रिटिश धरती पर किसी भी तरह की विदेशी जासूसी या डराने-धमकाने की गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सरकार ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में ब्रिटेन कोई समझौता नहीं करेगा। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिए कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी और सख्त की जा सकती है।
चीन ने आरोपों को बताया राजनीतिक खेल
दूसरी ओर चीन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। चीन के दूतावास ने बयान जारी कर कहा कि ब्रिटेन “एंटी-चाइना राजनीतिक खेल” खेलना बंद करे। चीन का दावा है कि यह पूरा मामला राजनीतिक माहौल बनाने और चीन की छवि खराब करने की कोशिश है।
चीनी राजदूत झेंग ज़ेगुआंग ने ब्रिटिश अधिकारियों से मुलाकात के दौरान अदालत के फैसले पर आपत्ति जताई और कहा कि चीन के खिलाफ जानबूझकर नकारात्मक माहौल तैयार किया जा रहा है।
पहले भी लग चुके हैं ऐसे आरोप
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका, ब्रिटेन और कई पश्चिमी देश पहले से ही चीन पर साइबर जासूसी, राजनीतिक हस्तक्षेप और निगरानी गतिविधियों के आरोप लगाते रहे हैं।
पिछले कुछ वर्षों में कई देशों ने दावा किया है कि चीन विदेशी संस्थानों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और सरकारी नेटवर्क पर निगरानी रखने की कोशिश करता रहा है। हालांकि चीन लगातार इन आरोपों को खारिज करता आया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में ब्रिटेन-चीन संबंधों को और अधिक प्रभावित कर सकता है। साथ ही यह दुनिया भर में विदेशी जासूसी और डिजिटल सुरक्षा को लेकर नई बहस को भी जन्म दे सकता है।

