Russia Ukraine conflict: यूक्रेन पर पुतिन का कड़ा संदेश: बातचीत नाकाम हुई तो रूस करेगा सैन्य कार्रवाई तेज़, पीछे नहीं हटेंगे

Putin
Putin

Russia Ukraine conflict: यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने साफ संकेत दिए हैं कि अगर शांति वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंचती, तो रूस यूक्रेन में अपनी सैन्य कार्रवाई और तेज़ करेगा। शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ हुई वार्षिक बैठक में पुतिन ने कहा कि मॉस्को कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देता है, लेकिन अगर रूस की शर्तों को नज़रअंदाज़ किया गया तो सैन्य ताकत के ज़रिए अपने लक्ष्य हासिल किए जाएंगे।

पुतिन ने दावा किया कि इस समय रूसी सेना पूरे युद्ध मोर्चे पर रणनीतिक रूप से मजबूत स्थिति में है। उन्होंने कहा कि रूस अपनी सीमाओं के पास एक “सुरक्षा बफर ज़ोन” का विस्तार जारी रखेगा, ताकि भविष्य में किसी भी खतरे को रोका जा सके। राष्ट्रपति के अनुसार, यूक्रेन युद्ध ने रूसी सेना को और अधिक अनुभवी बना दिया है। उन्होंने कहा, “हमारी सेना अब पूरी तरह युद्ध-परीक्षित है और आज के समय में दुनिया की सबसे सक्षम सेनाओं में शामिल है।”

परमाणु ताकत का भी ज़िक्र
अपने भाषण में पुतिन ने रूस की सैन्य क्षमताओं, खासकर परमाणु शक्ति, पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि देश अपने परमाणु शस्त्रागार को लगातार आधुनिक बना रहा है। पुतिन ने नई परमाणु क्षमता वाली ‘ओरेशनिक’ बैलिस्टिक मिसाइल का उल्लेख किया, जिसे इसी महीने सक्रिय युद्ध ड्यूटी में शामिल किया जाएगा। इससे पहले, नवंबर 2024 में रूस इस मिसाइल के पारंपरिक संस्करण का इस्तेमाल यूक्रेन के एक औद्योगिक संयंत्र पर कर चुका है।

शांति वार्ता पर बना हुआ है गतिरोध
पुतिन का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका, यूरोप और यूक्रेन के बीच अमेरिकी मसौदे पर आधारित शांति प्रस्ताव को लेकर बातचीत चल रही है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की का कहना है कि प्रस्ताव को जल्द अंतिम रूप दिया जा सकता है, लेकिन क्षेत्रीय नियंत्रण का मुद्दा अब भी सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।

रूस की मांग है कि यूक्रेन के चार विवादित क्षेत्रों और 2014 में अपने नियंत्रण में लिए गए क्रीमिया को औपचारिक रूप से रूसी क्षेत्र माना जाए। इसके साथ ही, मॉस्को चाहता है कि यूक्रेन NATO की सदस्यता का विचार पूरी तरह छोड़ दे। रूस ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर NATO देशों की सेनाएं यूक्रेन में तैनात की जाती हैं, तो उन्हें “वैध सैन्य लक्ष्य” माना जाएगा।

वहीं, राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने संकेत दिए हैं कि यदि पश्चिमी देश NATO जैसी ठोस सुरक्षा गारंटी देते हैं, तो यूक्रेन NATO सदस्यता पर पुनर्विचार कर सकता है। हालांकि, उन्होंने रूस की क्षेत्रीय मांगों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि यूक्रेन अपनी ज़मीन पर किसी तरह का समझौता नहीं करेगा।