पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के माहौल के बीच Pope Leo XIV ने वैश्विक नेताओं से तुरंत युद्धविराम करने की अपील की है। रविवार को अपने संबोधन में पोप ने कहा कि हिंसा और सैन्य कार्रवाई से कभी स्थायी न्याय, शांति या स्थिरता हासिल नहीं की जा सकती।
रविवार की प्रार्थना के बाद अपने संदेश में पोप ने उन सभी नेताओं से संघर्ष रोकने का आग्रह किया जो इस युद्ध के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हथियारों की जगह बातचीत को मौका दिया जाए।
संवाद के लिए रास्ता खोलने की अपील
अपने संबोधन में पोप ने कहा कि मध्य पूर्व के ईसाइयों और शांति की कामना रखने वाले सभी लोगों की ओर से वह युद्ध में शामिल नेताओं से अपील करते हैं कि वे तुरंत युद्धविराम करें। उनका कहना था कि केवल युद्ध रोकने से ही संवाद और कूटनीति के रास्ते दोबारा खुल सकते हैं।
हालांकि पोप ने अपने बयान में किसी देश का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन उनका यह संदेश उस संघर्ष के संदर्भ में आया है जो हाल ही में Iran में हुए हमलों के बाद तेजी से बढ़ गया है। इस संघर्ष में United States और Israel के भी शामिल होने की खबरें सामने आई हैं।
स्कूल पर हमले की घटना पर जताई पीड़ा
पोप ने अपने संबोधन में उस दर्दनाक घटना का भी जिक्र किया जिसमें एक स्कूल को निशाना बनाया गया था। रिपोर्टों के अनुसार इस मिसाइल हमले में 165 से अधिक लोगों की मौत हुई, जिनमें बड़ी संख्या बच्चों की बताई जा रही है।
यह घटना युद्ध के शुरुआती दिनों की सबसे दुखद घटनाओं में से एक मानी जा रही है। इस हमले ने दुनिया भर में चिंता और आक्रोश पैदा कर दिया है।
वेटिकन की चिंता और प्रतिक्रिया
इस त्रासदी को Vatican के आधिकारिक अखबार L’Osservatore Romano ने भी प्रमुखता से प्रकाशित किया। अखबार ने सामूहिक कब्र की तस्वीर के साथ इसे “युद्ध का चेहरा” बताते हुए मानवीय संकट की गंभीरता को उजागर किया।
पोप ने विशेष रूप से Lebanon की स्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। राहत एजेंसियों के अनुसार वहां मानवीय संकट तेजी से गहराता जा रहा है।
दक्षिणी लेबनान में रहने वाले ईसाई समुदायों की स्थिति वेटिकन के लिए खास चिंता का विषय बनी हुई है। यह समुदाय लंबे समय से मुस्लिम बहुल क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण धार्मिक समूह के रूप में मौजूद रहा है।
कूटनीतिक समाधान पर जोर
युद्ध शुरू होने के बाद से पोप लगातार संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने की अपील करते रहे हैं। उनका मानना है कि केवल बातचीत और समझौते के जरिए ही स्थायी शांति संभव है।
वेटिकन की पारंपरिक नीति के अनुसार पोप ने सार्वजनिक रूप से किसी भी देश का नाम लेने से परहेज किया। इसे वेटिकन की तटस्थ कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जाता है।
इसी संदर्भ में वेटिकन के विदेश मंत्री Cardinal Pietro Parolin ने भी कहा कि होली सी सभी पक्षों के साथ संवाद बनाए हुए है। उनका कहना है कि कूटनीतिक प्रयासों के जरिए इस संकट का शांतिपूर्ण समाधान खोजने की कोशिश जारी है।
वैश्विक शांति की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष का असर केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा। इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
ऐसे समय में विश्व के धार्मिक और राजनीतिक नेताओं की अपील महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पोप का यह संदेश भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने युद्ध की जगह संवाद को प्राथमिकता देने की अपील की है।

