पाकिस्तान ATC का सख्त फैसला: Imran Khan की बहन अलीमा खान पर गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी

Imran Khan
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Imran Khan News: पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। रावलपिंडी स्थित आतंकवाद-रोधी अदालत (ATC) ने नवंबर 2024 में हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़े एक मामले में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहन अलीमा खान के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। अदालत का यह सख्त फैसला उनकी लगातार अनुपस्थिति और बार-बार जारी किए गए समन के बावजूद अदालत में पेश न होने के कारण लिया गया।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुनवाई के दौरान अलीमा खान की ओर से उनके वकील फैसल मलिक अदालत में पेश हुए। उन्होंने दलील दी कि जब तक अलीमा खान के बैंक खाते और पहचान पत्र (ID) फ्रीज हैं, तब तक उनके लिए अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होना संभव नहीं है। वकील ने यह भी कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उनकी मुवक्किल को राहत दी जानी चाहिए।

हालांकि, अदालत ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। विशेष अभियोजक ज़हीर शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कोई भी आरोपी अदालत के समक्ष शर्तें नहीं रख सकता और न ही न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डाल सकता है। अभियोजक ने अलीमा खान के व्यवहार को शुरू से ही गैर-जिम्मेदाराना करार देते हुए कहा कि उनकी लगातार अनुपस्थिति कानून के प्रति अनादर को दर्शाती है।

अदालत ने अलीमा खान की व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट की मांग अस्वीकार करते हुए उनके ज़मानती को नोटिस जारी किया और मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी। इसके साथ ही अदालत ने रावलपिंडी के पुलिस अधीक्षक (SP) को निर्देश दिया कि अलीमा खान को गिरफ्तार कर अगली सुनवाई में अदालत के समक्ष पेश किया जाए। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि उनके बैंक खाते और पहचान पत्र तब तक फ्रीज रहेंगे, जब तक वे खुद अदालत में पेश नहीं होतीं।

यह मामला 26 नवंबर 2024 को हुए एक बड़े विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। उस दिन पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के समर्थकों ने सार्वजनिक सभाओं पर लगे प्रतिबंध को तोड़ते हुए इस्लामाबाद में प्रवेश किया था। डी-चौक के पास प्रदर्शनकारियों और कानून-व्यवस्था बलों के बीच तीखी झड़प हुई, जिसके बाद हालात काबू में करने के लिए पुलिस को आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा।

यह प्रदर्शन पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर किया गया था। PTI का यह आंदोलन तीन दिनों के लिए घोषित किया गया था, लेकिन हिंसा भड़कने के बाद इसे अचानक समाप्त कर दिया गया। इस मामले में अलीमा खान सहित कुल 11 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

इसी बीच, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने कराची और सिंध के अन्य हिस्सों में पार्टी कार्यकर्ताओं की कथित अवैध हिरासत को लेकर सिंध हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी का आरोप है कि मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर (MPO) ऑर्डिनेंस के तहत की गई छापेमारी में 180 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।

हालांकि, सिंध सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सभी कार्रवाई कानून के दायरे में की गई है। PTI सिंध महासचिव मंसूर अली और इंसाफ लॉयर्स फोरम के अध्यक्ष फैसल मुगल द्वारा दायर याचिका में MPO के तहत जारी आदेशों को रद्द करने और हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग की गई है। इस याचिका में मुख्य सचिव, आईजी पुलिस सिंध और कराची के विभिन्न जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों समेत कुल 14 प्रतिवादियों को नामित किया गया है।