Nepal Economy पर संकट: ADB ने घटाई ग्रोथ दर, जानें कारण

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Nepal Economy: नेपाल की अर्थव्यवस्था को लेकर एक चिंताजनक अनुमान सामने आया है। एशियाई विकास बैंक (ADB) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025–26 में देश की आर्थिक विकास दर में गिरावट दर्ज की जा सकती है। इस मंदी के पीछे दो प्रमुख कारण बताए गए हैं—पिछले साल की युवा-नेतृत्व वाली अशांति और पश्चिम एशिया में अमेरिका, ईरान और इज़राइल के बीच जारी तनाव।

ADB ने अपनी रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि नेपाल की अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष में केवल 2.7 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2024–25 में यह दर 4.6 प्रतिशत रही थी। यानी आर्थिक वृद्धि में स्पष्ट गिरावट देखने को मिल सकती है।

इस गिरावट की जड़ें पिछले साल सितंबर में शुरू हुए Gen-Z आंदोलन से जुड़ी हैं। उस समय युवाओं ने सोशल मीडिया पर प्रतिबंध, सीमित रोजगार अवसर और सरकारी जवाबदेही की कमी के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए थे। इन आंदोलनों ने देश की राजनीतिक स्थिति को हिला कर रख दिया था, जिसके परिणामस्वरूप तत्कालीन प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली की सरकार को इस्तीफा देना पड़ा। इससे देश में अस्थिरता और बढ़ गई।

हालांकि, हाल ही में हुए संघीय चुनावों के बाद स्थिति में कुछ सुधार के संकेत मिले हैं। नई सरकार राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के नेतृत्व में बनी है, जिसे मजबूत बहुमत प्राप्त है। ADB का मानना है कि इससे आने वाले समय में राजनीतिक स्थिरता और नीतिगत सुधारों को बढ़ावा मिल सकता है।

इसके बावजूद, अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां नेपाल की अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का कारण बनी हुई हैं। खासतौर पर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का सीधा असर नेपाल पर पड़ सकता है। वैश्विक तेल की कीमतों में संभावित वृद्धि, पर्यटन क्षेत्र में गिरावट और विदेशों से आने वाले रेमिटेंस में कमी जैसे खतरे सामने हैं।

नेपाल की अर्थव्यवस्था काफी हद तक रेमिटेंस पर निर्भर है, जिसमें खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों का योगदान लगभग 40 प्रतिशत है। यदि मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ता है, तो वहां काम कर रहे नेपाली श्रमिकों की आय और रोजगार पर असर पड़ सकता है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था कमजोर हो सकती है।

ADB के नेपाल कंट्री डायरेक्टर अर्नाड कॉचोइस ने कहा कि भले ही देश में राजनीतिक स्थिरता की ओर कदम बढ़ रहे हैं, लेकिन बाहरी जोखिम अभी भी बने हुए हैं। उनका मानना है कि मध्य-पूर्व का संघर्ष तेल की कीमतों, पर्यटन और रेमिटेंस पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि नेपाल के तीनों प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों—कृषि, उद्योग और सेवा—में इस वित्त वर्ष के दौरान सुस्ती देखने को मिल सकती है। कृषि क्षेत्र की विकास दर 3.3 प्रतिशत से घटकर 2.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिसका कारण देरी से आया मानसून और बाढ़ के चलते धान उत्पादन में कमी है।

वहीं, औद्योगिक क्षेत्र की वृद्धि दर भी 4.5 प्रतिशत से घटकर 2.8 प्रतिशत रह सकती है। इसका मुख्य कारण निवेशकों का कमजोर भरोसा और पूंजीगत खर्च में देरी बताया गया है, जिससे निर्माण और विनिर्माण गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

सेवा क्षेत्र, जो नेपाल की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है, उसमें भी गिरावट की आशंका जताई गई है। इसकी विकास दर 4.2 प्रतिशत से घटकर 2.8 प्रतिशत तक सीमित रह सकती है। थोक और खुदरा व्यापार में सुस्ती और रियल एस्टेट सेक्टर की धीमी रफ्तार इसके प्रमुख कारण हैं।

इसके अलावा, पर्यटन क्षेत्र पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। मार्च से मई के बीच नेपाल में पर्वतारोहण का पीक सीजन होता है, लेकिन मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के कारण ट्रांजिट मार्गों में बाधाएं आने की आशंका है, जिससे पर्यटकों की संख्या घट सकती है।

कुल मिलाकर, ADB की यह रिपोर्ट संकेत देती है कि नेपाल की अर्थव्यवस्था फिलहाल कई आंतरिक और बाहरी चुनौतियों का सामना कर रही है। आने वाले समय में राजनीतिक स्थिरता और वैश्विक परिस्थितियों में सुधार ही इस स्थिति को बेहतर बना सकते हैं।