पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच Mojtaba Khamenei ने ईरान के नए सर्वोच्च नेता के रूप में अपना पहला सार्वजनिक बयान जारी किया है। अपने संदेश में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक युद्ध जारी रहेगा, तब तक रणनीतिक जलमार्ग Strait of Hormuz बंद रहेगा। साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि खाड़ी क्षेत्र के पड़ोसी देशों और विरोधियों के खिलाफ ईरान की सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी।
यह बयान उस समय आया है जब मध्य पूर्व में Iran और Israel के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और कई देशों की सेनाएं भी इस संघर्ष में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल होती दिखाई दे रही हैं।
सरकारी टीवी के जरिए आया संदेश
मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति के बाद यह उनका पहला सार्वजनिक संदेश माना जा रहा है। गुरुवार को ईरान के सरकारी टेलीविजन पर एक समाचार एंकर ने उनका लिखित संदेश पढ़कर सुनाया। हालांकि इस दौरान खामेनेई कैमरे पर दिखाई नहीं दिए।
इजरायली सूत्रों के मुताबिक युद्ध की शुरुआत में हुए एक हमले में उनके घायल होने की आशंका भी जताई गई थी। हालांकि ईरान की ओर से इस बारे में आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
अपने संदेश में खामेनेई ने ईरानी सेना और सुरक्षा बलों से कहा कि वे होर्मुज़ जलडमरूमध्य का रणनीतिक रूप से पूरा इस्तेमाल करें। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
अमेरिकी सैन्य ठिकानों को चेतावनी
अपने पहले संबोधन में खामेनेई ने United States को भी कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य अड्डों को तुरंत बंद कर दिया जाना चाहिए। अगर ऐसा नहीं किया गया तो ईरान उन्हें संभावित सैन्य लक्ष्य मान सकता है।
उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी विदेशी सैन्य उपस्थिति को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा मानता है। उनके मुताबिक यदि अमेरिकी अड्डे सक्रिय रहे तो ईरानी सेना उन पर हमला करने से पीछे नहीं हटेगी।
इस बयान को क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं।
बदले और मुआवजे की बात
खामेनेई ने अपने संदेश में हाल के हमलों में मारे गए लोगों का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान अपने हर नुकसान का बदला लेगा। उन्होंने विशेष रूप से तथाकथित “मीनाब स्कूल हमले” में मारे गए लोगों का उल्लेख किया और उन्हें “शहीद” बताया।
उन्होंने कहा कि ईरान अपने नुकसान के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका से मुआवजा भी मांगेगा। अगर अमेरिका मुआवजा देने से इनकार करता है तो ईरान अमेरिकी संपत्तियों को जब्त करने या उन्हें नष्ट करने का विकल्प अपना सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान कूटनीतिक और आर्थिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
धार्मिक संदेश और एकता की अपील
अपने संबोधन में खामेनेई ने धार्मिक संदर्भों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ईरान की शक्ति उसकी आस्था, पवित्र कुरान और राष्ट्रीय एकता में निहित है। उन्होंने जनता और सेना के बीच मजबूत संबंधों पर जोर देते हुए देशवासियों से अपील की कि वे सभी मतभेदों को भुलाकर एकजुट रहें।
उन्होंने कहा कि ईरान के सैनिक और लड़ाके देश की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं और वे अपने विरोधियों को कड़ा जवाब देंगे।
खामेनेई ने कहा, “हमारे लड़ाके दुश्मनों को ऐसा जवाब देंगे कि उन्हें होर्मुज और अन्य मोर्चों पर आकर पछतावा होगा।”
वैश्विक असर की आशंका
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वास्तव में होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है तो इसका असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है।
ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को और ऊपर ले जा सकता है और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
फिलहाल दुनिया भर की नजरें मध्य पूर्व की स्थिति पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यहां होने वाली हर सैन्य और राजनीतिक गतिविधि का असर वैश्विक बाजार और सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है।

