Middle East War Impact: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और Iran–Israel संघर्ष का असर अब केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं रहा है। इसका प्रभाव धीरे-धीरे रोजमर्रा के इस्तेमाल की कई चीजों की कीमतों पर भी दिखने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पैकेजिंग इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी के कारण आने वाले समय में पीने के पानी, कोल्ड ड्रिंक, खाने के तेल, जूस और अन्य पैक्ड उत्पाद महंगे हो सकते हैं।
दरअसल, पैक्ड खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों के लिए इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक बोतलों और कंटेनरों की लागत बढ़ रही है। इसका मुख्य कारण पैकेजिंग के लिए जरूरी कच्चे माल की कीमतों में अचानक आई तेजी है।
पैकेजिंग महंगी, कंपनियों की लागत बढ़ी
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, लगभग सभी पैक्ड उत्पाद—जैसे बोतलबंद पानी, सॉफ्ट ड्रिंक, जूस, खाने का तेल, अचार और मसाले—प्लास्टिक बोतलों या कंटेनरों में पैक होकर बाजार में आते हैं। इन पैकिंग सामग्रियों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल अब तेजी से महंगा हो रहा है।
कंपनियों का कहना है कि जब पैकेजिंग लागत बढ़ती है, तो उसका सीधा असर उत्पाद की कुल कीमत पर पड़ता है। यानी कंपनियों को या तो अपने मुनाफे में कटौती करनी पड़ती है या फिर उत्पादों की कीमत बढ़ानी पड़ती है।
इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों का मानना है कि अगर मौजूदा स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो बाजार में मिलने वाले कई पैक्ड प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ सकते हैं।
पैकिंग मटेरियल कैसे बनता है?
पैकिंग इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल PET रेजिन होता है। यह एक प्रकार का प्लास्टिक कच्चा माल है, जो पेट्रोलियम से बनने वाला एक बाय-प्रोडक्ट होता है। इसी PET रेजिन से प्लास्टिक बोतलें, कंटेनर और कई तरह की पैकेजिंग सामग्री बनाई जाती है।
इसके उत्पादन में ऊर्जा और गैस की भी बड़ी भूमिका होती है। खासतौर पर Liquefied Petroleum Gas (LPG) जैसे ईंधन का इस्तेमाल कई औद्योगिक प्रक्रियाओं में किया जाता है। इसलिए जब कच्चे तेल या गैस की कीमतें बढ़ती हैं, तो उसका असर पैकेजिंग इंडस्ट्री पर भी दिखाई देने लगता है।
बताया जा रहा है कि हाल के महीनों में ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव और वैश्विक सप्लाई में अनिश्चितता के कारण PET रेजिन की उपलब्धता प्रभावित हुई है। इसके चलते इसकी कीमतों में तेज उछाल देखा गया है।
PET रेजिन की कीमतों में भारी उछाल
पैकेजिंग इंडस्ट्री से जुड़े कारोबारियों के मुताबिक, हाल ही में PET रेजिन की कीमतों में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कुछ समय पहले तक इसकी कीमत लगभग 90 रुपये प्रति किलो के आसपास थी, लेकिन अब यह बढ़कर करीब 140 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।
इस तरह कम समय में इसकी कीमत में लगभग 40 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी गई है। उद्योग जगत का कहना है कि इतनी बड़ी बढ़ोतरी से उत्पादन लागत पर सीधा असर पड़ा है।
जम्मू सहित कई औद्योगिक क्षेत्रों में पैकेजिंग सामग्री से जुड़े उद्योगपतियों ने बताया कि कच्चा माल महंगा होने के साथ-साथ उसकी उपलब्धता भी कम हो रही है। इससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है और कंपनियों को लागत संभालने में मुश्किल आ रही है।
उद्योग जगत में बढ़ी चिंता
पैकेजिंग उद्योग से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि अगर कच्चे माल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले महीनों में पैकिंग सामग्री के दाम और बढ़ सकते हैं। कई कंपनियों ने पहले ही प्लास्टिक बोतलों और कंटेनरों की कीमतों में बढ़ोतरी शुरू कर दी है।
इसका असर धीरे-धीरे बाजार में मिलने वाले कई पैक्ड उत्पादों पर दिखाई दे सकता है। कंपनियां लागत बढ़ने के कारण अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने पर मजबूर हो सकती हैं।
उपभोक्ताओं की जेब पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी रहती है, तो आम लोगों को रोजमर्रा की खरीदारी में महंगाई का सामना करना पड़ सकता है। बोतलबंद पानी, कोल्ड ड्रिंक, जूस, खाने का तेल और अन्य पैक्ड फूड आइटम धीरे-धीरे महंगे हो सकते हैं।
इस तरह पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब सीधे उपभोक्ताओं की जेब तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ऊर्जा बाजार में स्थिरता कब लौटती है और पैकेजिंग इंडस्ट्री की लागत कब तक सामान्य स्तर पर आती है।

