London: ईरान में लंबे समय से जारी जनआक्रोश (Iran Protest) अब देश की सीमाओं से बाहर निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर गूंजने लगा है। यूरोप तक पहुंचे इस विरोध की ताजा तस्वीर ब्रिटेन की राजधानी लंदन से सामने आई है, जहां एक प्रदर्शनकारी ने ईरानी दूतावास की इमारत से ईरान का राष्ट्रीय ध्वज उतारकर उसे फाड़ दिया। इस घटना ने ईरान संकट को एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में ला दिया है।
यह घटना उस समय हुई जब लंदन की सड़कों पर बड़ी संख्या में ईरानी प्रवासी, मानवाधिकार कार्यकर्ता और सरकार-विरोधी समर्थक एकत्र होकर तेहरान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ईरान में आम जनता की आवाज को बलपूर्वक दबाया जा रहा है। उनके अनुसार, विरोध करने वालों पर गोलियां चलाई जा रही हैं, बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हो रही हैं और इंटरनेट सेवाओं को बंद कर सच्चाई को दुनिया से छिपाने की कोशिश की जा रही है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति ईरानी दूतावास की इमारत के पास पहुंचा और वहां लगी बालकनी से ईरान का झंडा उतार लिया। इसके बाद उसने झंडे को फाड़ दिया। यह पूरा दृश्य वहां मौजूद लोगों ने अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर लिया, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस घटना को कई लोग ईरानी शासन के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध और गुस्से की अभिव्यक्ति के रूप में देख रहे हैं।
प्रदर्शन के दौरान “तानाशाही मुर्दाबाद”, “खामेनेई हटाओ” और “ईरान को आज़ादी दो” जैसे नारे गूंजते रहे। कई प्रदर्शनकारियों ने अपने हाथों में उन लोगों की तस्वीरें पकड़ रखी थीं, जो कथित तौर पर ईरान में विरोध प्रदर्शन के दौरान मारे गए हैं। इसके साथ ही मानवाधिकार उल्लंघनों से जुड़े पोस्टर और बैनर भी दिखाई दिए, जिनमें अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की गई।
घटना की सूचना मिलते ही ब्रिटिश पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में लिया। हालांकि किसी बड़े टकराव या हिंसा की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन एहतियात के तौर पर ईरानी दूतावास के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि दूतावास की सुरक्षा में कोई चूक तो नहीं हुई और प्रदर्शनकारी वहां तक कैसे पहुंचा।
विशेषज्ञों का मानना है कि लंदन की यह घटना इस बात का संकेत है कि ईरान में चल रहा विरोध अब केवल आंतरिक मामला नहीं रह गया है। यूरोप, अमेरिका और कनाडा में बसे ईरानी समुदाय लगातार अपने-अपने देशों की सरकारों से मांग कर रहे हैं कि वे तेहरान पर राजनीतिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ाएं।
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, ईरान में अब तक सैकड़ों लोग प्रदर्शन के दौरान मारे जा चुके हैं और हजारों को हिरासत में लिया गया है। इंटरनेट और संचार सेवाओं पर लगे प्रतिबंधों के चलते वास्तविक स्थिति की जानकारी बाहर आना मुश्किल हो गया है। लंदन में दूतावास से झंडा उतारे जाने की घटना को ईरानी शासन के लिए एक बड़ी कूटनीतिक शर्मिंदगी के रूप में देखा जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि ऐसे अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन और तेज होते हैं, तो ईरान पर वैश्विक दबाव और अधिक बढ़ सकता है।

