Israel Iran Ceasefire: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच इजरायल ने एक अहम बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि वह ईरान के साथ हुए अस्थायी युद्धविराम (सीजफायर) का पूरी तरह पालन कर रहा है। इजरायली सेना ने कहा है कि उसने ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान फिलहाल रोक दिए हैं और समझौते की शर्तों का सम्मान किया जा रहा है। यह निर्णय सरकार के उच्च स्तर पर लिए गए निर्देशों के बाद लागू किया गया है। हालांकि, इसके साथ ही इजरायल ने चेतावनी दी है कि उसकी सेना पूरी तरह सतर्क है और अगर ईरान ने किसी भी तरह से समझौते का उल्लंघन किया, तो तुरंत जवाबी कार्रवाई की जाएगी।
ईरान तक सीमित है युद्धविराम
इजरायल ने साफ शब्दों में कहा है कि यह युद्धविराम केवल ईरान के साथ लागू है, न कि पूरे क्षेत्र में। लेबनान को लेकर उसका रुख पहले जैसा ही आक्रामक बना हुआ है। इजरायली सेना ने बताया कि वह लेबनान में Hezbollah के खिलाफ अपने ऑपरेशन लगातार जारी रखे हुए है। इसमें जमीनी कार्रवाई के साथ-साथ हवाई हमले भी शामिल हैं।
इसका मतलब साफ है कि जहां एक ओर इजरायल और ईरान के बीच फिलहाल शांति बनाए रखने की कोशिश हो रही है, वहीं दूसरी ओर लेबनान में संघर्ष थमता नजर नहीं आ रहा। इससे पूरे क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है।
अमेरिका की पहल के बाद बना समझौता
यह युद्धविराम अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की पहल के बाद संभव हो सका। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने ईरान को स्पष्ट चेतावनी दी थी कि अगर वह दो हफ्तों तक हमले रोकने और Strait of Hormuz को दोबारा खोलने के लिए तैयार नहीं हुआ, तो अमेरिका और उसके सहयोगी बड़े पैमाने पर कार्रवाई कर सकते हैं।
इस दबाव के बाद ईरान ने अस्थायी रूप से हमले रोकने पर सहमति जताई, जिसके बाद यह सीजफायर लागू किया गया। हालांकि, इस समझौते को लेकर अभी भी कई तरह की अनिश्चितताएं बनी हुई हैं।
संघर्ष की शुरुआत कैसे हुई?
इस पूरे विवाद की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान के खिलाफ बड़े स्तर पर सैन्य कार्रवाई की। इस हमले के बाद हालात तेजी से बिगड़ गए और क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया।
ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल, जॉर्डन, इराक और खाड़ी देशों में ड्रोन और मिसाइल हमले किए। इन हमलों का मुख्य निशाना वे क्षेत्र थे जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। इसके चलते पूरे मिडिल ईस्ट में युद्ध का खतरा काफी बढ़ गया।
भारी नुकसान और वैश्विक असर
करीब पांच हफ्तों तक चले इस संघर्ष में 1400 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इनमें कई उच्च स्तर के सैन्य अधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं। इस युद्ध ने न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित किया, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी इसके गंभीर असर देखने को मिले हैं।
खासतौर पर तेल बाजार पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा है। Strait of Hormuz, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई मार्गों में से एक है, इस पूरे विवाद का केंद्र बन गया। ईरान द्वारा इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित किए जाने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा संकट खड़ा हो गया था।
अब सीजफायर की शर्तों में इस जलमार्ग को दोबारा खोलना शामिल है, जिससे वैश्विक बाजार में कुछ स्थिरता आने की उम्मीद जताई जा रही है।
आगे क्या?
हालांकि फिलहाल इजरायल और ईरान के बीच तनाव कुछ हद तक कम हुआ है, लेकिन स्थिति अभी भी बेहद नाजुक बनी हुई है। लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई और क्षेत्रीय राजनीति को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि यह शांति कितने समय तक कायम रह पाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसी भी पक्ष ने समझौते का उल्लंघन किया, तो हालात एक बार फिर बड़े युद्ध की ओर बढ़ सकते हैं।

