Iran Namaz app hack: ईरान और इजराइल के बीच जारी टकराव अब पारंपरिक सैन्य हमलों से आगे बढ़कर डिजिटल मोर्चे तक पहुंच गया है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, इजराइल से जुड़े हैकर्स ने ईरान के लोकप्रिय प्रार्थना ऐप ‘बड़े सबा कैलेंडर’ को निशाना बनाया। यह ऐप नमाज़ के समय और इस्लामी कैलेंडर की जानकारी देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है और गूगल प्ले स्टोर पर इसके 50 लाख से अधिक डाउनलोड बताए जाते हैं।
फोन पर आए रहस्यमयी नोटिफिकेशन
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस दौरान तेहरान पर अमेरिकी और इजराइली मिसाइल हमलों की खबरें सामने आ रही थीं, उसी समय लाखों ईरानी नागरिकों के मोबाइल फोन पर असामान्य नोटिफिकेशन दिखाई देने लगे। इन संदेशों में फारसी भाषा में लिखा था – “मदद आ गई है।”
कथित तौर पर इन नोटिफिकेशन के जरिए ईरानी सेना, खासकर Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) के जवानों से अपील की गई कि वे हथियार डाल दें, मौजूदा शासन के खिलाफ आवाज उठाएं और देश को “आजाद” कराएं। इस तरह के संदेशों ने देश के भीतर हलचल मचा दी और साइबर सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए।
बड़े ऑपरेशन का हिस्सा?
विश्लेषकों का मानना है कि यह साइबर हमला किसी बड़े रणनीतिक अभियान का हिस्सा हो सकता है। इसी अवधि में ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei और कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के मारे जाने की खबरें भी चर्चा में रहीं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सीमित है, लेकिन घटनाक्रम ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है।
इसके अलावा, ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी Islamic Republic News Agency (IRNA) सहित कई अन्य सरकारी वेबसाइटों को भी कथित रूप से हैक किया गया। इन प्लेटफॉर्म्स पर शासन विरोधी संदेश और विवादित सामग्री पोस्ट की गई, जिससे सूचना युद्ध का नया आयाम सामने आया।
डिजिटल जंग का बढ़ता दायरा
साइबर हमले अब आधुनिक युद्ध का अहम हिस्सा बन चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को निशाना बनाकर न केवल सूचनात्मक अराजकता फैलाई जा सकती है, बल्कि सैनिकों और आम नागरिकों के मनोबल पर भी असर डाला जा सकता है। प्रार्थना जैसे धार्मिक ऐप को टारगेट करना प्रतीकात्मक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालने की रणनीति मानी जा रही है।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ा तनाव
इन साइबर हमलों और मिसाइल हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव और गहरा गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी क्षेत्र, खासकर United Arab Emirates (UAE) और वहां स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने बयान दिया कि जब तक आवश्यक होगा, अमेरिकी सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। इस बयान ने संकेत दिया कि संघर्ष लंबा खिंच सकता है।
बढ़ती चिंताएं
इस घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ईरान-इजराइल संघर्ष केवल पारंपरिक युद्ध तक सीमित नहीं है, बल्कि साइबर स्पेस भी एक बड़ा रणक्षेत्र बन चुका है। डिजिटल बुनियादी ढांचे, धार्मिक ऐप्स और सरकारी वेबसाइटों को निशाना बनाना आधुनिक युद्ध की नई रणनीति का हिस्सा बनता जा रहा है।
विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि यह साइबर और सैन्य टकराव जारी रहा, तो इसका असर न केवल संबंधित देशों पर बल्कि पूरे मध्य-पूर्व और वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। फिलहाल, क्षेत्र में स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और दुनिया की नजरें इस बढ़ते डिजिटल और सैन्य संघर्ष पर टिकी हैं।

