Islamabad Trilateral Talks: अगले 48 घंटे अहम, अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ा तनाव

Islamabad Trilateral Talks
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Islamabad Trilateral Talks: इस्लामाबाद में अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान के बीच बहुप्रतीक्षित त्रिपक्षीय वार्ता आखिरकार शुरू हो गई है। यह बातचीत ऐसे समय हो रही है जब मध्य-पूर्व क्षेत्र में तनाव चरम पर है और पूरी दुनिया की नजर इस बैठक पर टिकी हुई है। आने वाले 48 घंटे इस बात का फैसला कर सकते हैं कि यह वार्ता किसी ऐतिहासिक समझौते की ओर बढ़ेगी या फिर एक और असफल कूटनीतिक प्रयास बनकर रह जाएगी।

वार्ता से पहले अमेरिका के उपराष्ट्रपति J. D. Vance ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif से मुलाकात की। इस बैठक में Steve Witkoff और Jared Kushner भी शामिल रहे। अमेरिकी पक्ष ने साफ संकेत दिया कि क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दे उनके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता हैं।

ईरान की अलग बैठक और कड़ी शर्तें

दूसरी ओर, ईरान के प्रतिनिधिमंडल ने भी अलग बैठक में प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif से बातचीत की। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व Mohammad Bagher Ghalibaf कर रहे हैं, जबकि Abbas Araghchi भी उनके साथ मौजूद हैं।

ईरान ने वार्ता की शुरुआत से पहले ही अपनी शर्तें स्पष्ट कर दी हैं। उसने लेबनान में युद्धविराम और विदेशों में जमी अपनी संपत्तियों को मुक्त करने की मांग रखी है। ईरान का कहना है कि इन मुद्दों पर ठोस प्रगति के बिना आगे बढ़ना संभव नहीं होगा।

पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका

Pakistan इस पूरी प्रक्रिया में खुद को एक मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री Ishaq Dar ने उम्मीद जताई है कि दोनों पक्ष रचनात्मक बातचीत करेंगे और किसी स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

पाकिस्तान की कोशिश है कि वह दोनों देशों के बीच संवाद का पुल बने और क्षेत्र में स्थिरता लाने में अहम भूमिका निभाए।

मतभेदों ने बढ़ाई जटिलता

हालांकि, वार्ता की शुरुआत से पहले ही कई बड़े मतभेद सामने आ चुके हैं। जहां ईरान अपनी आर्थिक और रणनीतिक मांगों पर अड़ा हुआ है, वहीं अमेरिका ने ईरान की संपत्तियों को रिलीज करने की खबरों को खारिज कर दिया है। इससे बातचीत का माहौल और जटिल हो गया है।

इस बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को हर हाल में जहाजों के लिए खुला रखा जाएगा। उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना अपनी प्राथमिकता बताया, जिससे तनाव और बढ़ सकता है।

ईरान का स्पष्ट संदेश

ईरान की ओर से भी कड़े संकेत दिए गए हैं। ईरान के उपराष्ट्रपति Mohammad Reza Aref ने कहा कि अगर अमेरिका “America First” नीति के तहत बातचीत करता है, तो समझौते की संभावना बन सकती है। लेकिन अगर “Israel First” दृष्टिकोण अपनाया गया, तो किसी भी डील की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए।

यह बयान दर्शाता है कि ईरान अपनी शर्तों पर समझौता करने के लिए तैयार है, लेकिन वह अपने रणनीतिक हितों से समझौता नहीं करेगा।

अगले 48 घंटे क्यों हैं अहम?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह वार्ता बेहद संवेदनशील मोड़ पर है। अगले 48 घंटे इस बात का निर्धारण करेंगे कि क्या दोनों पक्ष अपने मतभेदों को कम कर पाते हैं या नहीं।

अगर कोई ठोस प्रगति होती है, तो यह न केवल अमेरिका और ईरान के संबंधों में सुधार लाएगी, बल्कि पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र में शांति और स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है। वहीं, अगर वार्ता विफल रहती है, तो क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है।

इस्लामाबाद में शुरू हुई यह त्रिपक्षीय वार्ता वैश्विक राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जहां एक ओर उम्मीदें हैं कि यह बातचीत नए रास्ते खोलेगी, वहीं दूसरी ओर गहरे मतभेद इसे कठिन बना रहे हैं। अब सबकी नजर अगले 48 घंटों पर है, जो तय करेंगे कि यह कूटनीतिक प्रयास सफलता की कहानी बनेगा या फिर एक और अधूरी कोशिश बनकर रह जाएगा।