UAE Missile Attack: UAE हमलों के बाद ईरान-अमेरिका संघर्षविराम पर संकट

UAE Missile Attack
UAE Missile Attack

UAE Missile Attack: मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। Iran और United States के बीच जारी नाजुक संघर्षविराम अब खतरे में दिखाई दे रहा है। United Arab Emirates ने अपने क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल हमलों की पुष्टि की है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव एक बार फिर तेजी से बढ़ गया है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते और युद्ध समाप्त करने को लेकर बातचीत जारी थी। ताजा हमलों ने इस प्रक्रिया को और जटिल बना दिया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र

इससे कुछ घंटे पहले अमेरिका ने दावा किया था कि उसने Strait of Hormuz में अपने नौसैनिक जहाजों पर हुए हमलों को विफल कर दिया। अमेरिकी सेना के अनुसार, उसके तीन युद्धपोतों को निशाना बनाया गया था, लेकिन सभी जहाज सुरक्षित रहे।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि जवाबी कार्रवाई में उन ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया जो कथित तौर पर मिसाइल, ड्रोन और छोटी नौकाओं के जरिए हमलों में शामिल थे।

अमेरिका ने स्पष्ट किया कि उसकी कार्रवाई आत्मरक्षा के तहत की गई और उसका तनाव बढ़ाने का इरादा नहीं है। हालांकि, वॉशिंगटन ने यह भी कहा कि वह अपने सैनिकों और समुद्री हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।

ट्रंप की नई चेतावनी

Donald Trump ने हालिया घटनाओं के बाद ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि तेहरान जल्द किसी समझौते पर सहमत नहीं होता, तो अमेरिका और अधिक कठोर कदम उठा सकता है।

ट्रंप ने कहा कि ईरान को समझना होगा कि समझौते में देरी का उसे भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि समझौता “किसी भी दिन” हो सकता है, लेकिन यह भी संभव है कि बातचीत विफल हो जाए।

ईरान कर रहा प्रस्तावों की समीक्षा

ईरान की ओर से कहा गया है कि वह अमेरिका की ओर से भेजे गए ताजा प्रस्तावों की समीक्षा कर रहा है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने बताया कि इस्लामिक गणराज्य पाकिस्तान के जरिए मिले संदेशों का अध्ययन कर रहा है।

हालांकि ईरानी सरकारी मीडिया ने स्पष्ट किया कि अभी तक किसी अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंचा गया है और अमेरिका को कोई औपचारिक जवाब नहीं दिया गया है।

पाकिस्तान निभा रहा मध्यस्थ की भूमिका

Pakistan इस पूरे विवाद में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री Ishaq Dar ने ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi से फोन पर बातचीत की।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस्लामाबाद लगातार दोनों पक्षों के संपर्क में है और क्षेत्र में स्थायी शांति चाहता है। प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने भी कहा कि पाकिस्तान युद्ध रोकने और संघर्षविराम को बनाए रखने के प्रयासों में सक्रिय रूप से शामिल है।

होर्मुज पर नियंत्रण से बढ़ी वैश्विक चिंता

इस बीच एक शिपिंग डेटा कंपनी की रिपोर्ट ने नई चिंता पैदा कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की निगरानी और शुल्क वसूली के लिए नई सरकारी एजेंसी बनाई है।

बताया जा रहा है कि “Persian Gulf Strait Authority” नाम की यह एजेंसी खुद को जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए एकमात्र वैध प्राधिकरण के रूप में स्थापित करना चाहती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान जहाजों पर नियंत्रण और टैक्स वसूली लागू करता है, तो इसका असर वैश्विक व्यापार, तेल आपूर्ति और ऊर्जा बाजार पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।

वैश्विक व्यापार और तेल बाजार पर असर

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस आपूर्ति मार्गों में शामिल है। यहां बढ़ते तनाव के कारण सैकड़ों वाणिज्यिक जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं।

अमेरिका की ओर से ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी और ईरान की जवाबी कार्रवाइयों ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ईंधन की कीमतों को प्रभावित किया है। कई विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि स्थिति और बिगड़ी, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

संयुक्त राष्ट्र में बढ़ सकता है विवाद

अमेरिका और उसके खाड़ी सहयोगी अब United Nations Security Council में एक प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें ईरान द्वारा होर्मुज पर नियंत्रण की कोशिशों की निंदा की जा सकती है।

हालांकि इससे पहले रूस और चीन ऐसे एक प्रस्ताव को वीटो कर चुके हैं। अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में कूटनीतिक बातचीत सफल होती है या क्षेत्र एक बड़े संघर्ष की ओर बढ़ता है।