ट्रंप के सरेंडर बयान पर ईरान का जवाब, OTP-4 का नया चरण

Masoud Pezeshkian
Masoud Pezeshkian

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच बयानबाजी तेज होती जा रही है। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने हाल ही में अपने बयान को लेकर उठे विवाद पर सफाई दी है। उनका कहना है कि क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई को लेकर दिए गए उनके पुराने बयान को “दुश्मनों ने गलत तरीके से पेश किया” और उसका गलत अर्थ निकाला गया।

राज्य मीडिया के हवाले से आई रिपोर्टों के अनुसार पेजेश्कियान ने स्पष्ट किया कि ईरान अपने पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण और भाईचारे के संबंध बनाए रखना चाहता है। उन्होंने कहा कि ईरान लंबे समय से यह संदेश देता आया है कि वह अपने पड़ोसियों को “भाई” मानता है और उनके साथ सहयोग और स्थिरता चाहता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अगर ईरान पर हमला किया जाता है, तो जवाब देना उसकी मजबूरी होगी।

पड़ोसी देशों को लेकर ईरान का संदेश

शनिवार को दिए गए एक टेलीविजन संबोधन में पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान किसी भी पड़ोसी देश पर हमला नहीं करेगा, जब तक कि वहां से ईरान के खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई नहीं होती।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र में शांति बनाए रखना सभी देशों की जिम्मेदारी है। अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि ईरान का किसी देश पर हमला करने का इरादा नहीं है और अगर उनके बयान से किसी को गलतफहमी हुई है तो वह स्पष्ट करना चाहते हैं कि ईरान संघर्ष नहीं बल्कि स्थिरता चाहता है।

पेजेश्कियान के मुताबिक, “हमने हमेशा कहा है कि हम अपने पड़ोसियों के साथ सम्मानजनक रिश्ते चाहते हैं। लेकिन यदि हमारे देश की सुरक्षा को खतरा होगा तो हम चुप नहीं बैठेंगे।”

ट्रंप की ‘सरेंडर’ टिप्पणी पर पलटवार

ईरान के इस बयान के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump की टिप्पणी भी चर्चा में रही। ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि ईरान के साथ कोई भी समझौता तभी संभव है जब वह “बिना शर्त आत्मसमर्पण” करे।

ट्रंप ने यह बयान अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए दिया था। उन्होंने यह भी कहा था कि ईरान में नई नेतृत्व व्यवस्था आने के बाद ही किसी समझौते की संभावना बन सकती है।

ट्रंप के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पेजेश्कियान ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा, “वे हमारे आत्मसमर्पण का सपना अपने साथ कब्र में ले जाएंगे।” उनके इस बयान को ईरान की सख्त प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है।

इजराइल के बड़े हवाई हमले

इसी बीच क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। रिपोर्टों के अनुसार शुक्रवार रात Israeli Air Force ने ईरान से जुड़े ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए।

इन हमलों में 80 से अधिक लड़ाकू विमानों ने हिस्सा लिया और लगभग 230 बम गिराए गए। हमलों का मुख्य लक्ष्य ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल से जुड़ी सुविधाएं और सैन्य प्रशिक्षण केंद्र बताए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि इन हमलों से ईरान के सैन्य ढांचे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।

ईरान का जवाब: OTP-4 का 23वां चरण

इजराइल की इस कार्रवाई के बाद ईरान ने भी जवाबी कदम उठाए हैं। ईरान की शक्तिशाली सैन्य इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps ने घोषणा की है कि उसने Operation True Promise 4 यानी OTP-4 के 23वें चरण की शुरुआत कर दी है।

आईआरजीसी के अनुसार इस चरण के दौरान नई पीढ़ी की मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया है। इन मिसाइलों का लक्ष्य इजराइल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने बताए जा रहे हैं।

ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई हालिया हमलों के जवाब में की गई है और इसका उद्देश्य अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखना है।

क्षेत्र में बढ़ता तनाव

विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते बयान और सैन्य गतिविधियां मध्य-पूर्व में तनाव को और बढ़ा सकती हैं। अगर कूटनीतिक समाधान जल्दी नहीं निकला, तो यह टकराव और गंभीर रूप ले सकता है।

ईरान के राष्ट्रपति का कहना है कि उनका देश युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से कोई समझौता भी नहीं करेगा। फिलहाल दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह टकराव किस दिशा में जाता है।