ईरान ने ट्रंप के सीजफायर को बताया चाल, अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा

Iran Trump ceasefire
Iran Trump ceasefire

Iran Trump ceasefire: मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा युद्धविराम (सीजफायर) को एकतरफा बढ़ाने की घोषणा पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान ने इस कदम को “रणनीतिक चाल” करार देते हुए साफ कहा है कि उसने कभी भी युद्धविराम बढ़ाने की मांग नहीं की थी।

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने बयान जारी करते हुए कहा कि उनका देश “धमकियों के साये में” किसी भी तरह की बातचीत या युद्धविराम विस्तार के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की जारी नौसैनिक नाकेबंदी की कड़ी निंदा की और इसे “युद्ध की कार्रवाई” बताते हुए मौजूदा युद्धविराम सिद्धांतों का उल्लंघन बताया।

अराघची ने स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है और वह अपनी संप्रभुता की रक्षा करना जानता है। उनके इस बयान से यह संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के बजाय और बढ़ सकता है।

इस बीच, ईरानी संसद के अध्यक्ष के वरिष्ठ सलाहकार Mehdi Mohammadi ने भी ट्रंप के सीजफायर विस्तार को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ईरान के नजरिये से इस घोषणा का “कोई वास्तविक महत्व” नहीं है। उन्होंने इसे एक ऐसी रणनीति बताया, जिसका उद्देश्य अचानक हमले के लिए समय हासिल करना हो सकता है। उनका कहना था कि जो पक्ष खुद दबाव में हो, वह शर्तें तय नहीं कर सकता।

संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि Amir Saeid Iravani ने भी अमेरिका के रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब तक अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म नहीं करता, तब तक किसी भी औपचारिक शांति वार्ता में शामिल होना संभव नहीं है। यह शर्त ईरान की ओर से स्पष्ट संकेत है कि वह पहले अमेरिका से ठोस कदम चाहता है।

ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसियों ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने दोहराया कि ईरान ने कभी भी युद्धविराम बढ़ाने की मांग नहीं की और यदि जरूरत पड़ी तो वह अमेरिकी नाकेबंदी को बलपूर्वक तोड़ने से भी पीछे नहीं हटेगा।

ट्रंप द्वारा सीजफायर बढ़ाने की घोषणा ऐसे समय में आई है जब युद्ध के दौरान कई बड़े घटनाक्रम सामने आ चुके हैं। हालांकि उन्होंने हमलों को रोकने की बात कही है, लेकिन अमेरिकी सेना को नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखने का निर्देश दिया गया है, जो ईरान के लिए सबसे बड़ा विवाद का मुद्दा बना हुआ है।

ट्रंप ने अपने बयान में यह भी दावा किया था कि ईरानी सरकार के भीतर “गहरी दरार” है, जिसके कारण उन्होंने युद्धविराम को बढ़ाने का फैसला किया। हालांकि ईरानी अधिकारियों ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है और कहा है कि देश अपनी “10-सूत्रीय शांति योजना” पर कायम है।

ईरान की एक अन्य अर्ध-सरकारी एजेंसी ने अज्ञात अधिकारियों के हवाले से दावा किया कि ट्रंप की यह घोषणा इस बात का संकेत हो सकती है कि अमेरिका युद्ध में अपनी स्थिति मजबूत नहीं कर पाया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अमेरिका ने युद्ध के दौरान सभी संभावित विकल्प आजमा लिए हैं, लेकिन उसे कोई ठोस सफलता नहीं मिली।

इन रिपोर्टों में यह भी चेतावनी दी गई कि भले ही अमेरिका युद्धविराम बढ़ाने का दावा कर रहा हो, लेकिन वह किसी भी समय नई सैन्य कार्रवाई कर सकता है। साथ ही, यह आशंका भी जताई गई कि इजरायल क्षेत्र में तनाव बनाए रखने के लिए अलग से कार्रवाई कर सकता है।

ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि जब तक नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी, तब तक वह Strait of Hormuz को नहीं खोलेगा। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, और इसके बंद रहने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर बड़ा असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका ईरान पर दबाव बनाए रखने के लिए “युद्ध का साया” कायम रखना चाहता है, ताकि उसकी अर्थव्यवस्था और राजनीतिक स्थिति कमजोर बनी रहे। हालांकि ईरान ने साफ संकेत दिया है कि वह इस रणनीति के सामने झुकने वाला नहीं है।

कुल मिलाकर, मौजूदा हालात यह दर्शाते हैं कि दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की बजाय और जटिल होता जा रहा है। जब तक दोनों पक्ष ठोस कूटनीतिक कदम नहीं उठाते, तब तक क्षेत्र में शांति स्थापित होना मुश्किल नजर आता है।