पर्शियन गल्फ क्षेत्र में बढ़ते तनाव और समुद्री सुरक्षा को लेकर दुनिया भर में चिंता के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। भारत में Iran के राजदूत Mohammad Fattahali ने संकेत दिया है कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक Strait of Hormuz से गुजरने वाले भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया जा सकता है।
राजदूत का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और सुरक्षा चिंताओं के कारण इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है।
भारत को लेकर ईरान का सकारात्मक संकेत
पत्रकारों से बातचीत के दौरान मोहम्मद फतहाली ने कहा कि भारत और ईरान के बीच लंबे समय से दोस्ताना और सहयोगात्मक संबंध रहे हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या मौजूदा तनावपूर्ण हालात के बीच भारत को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित मार्ग मिल सकेगा, तो उन्होंने सकारात्मक संकेत दिए।
उन्होंने कहा कि भारत ईरान का एक महत्वपूर्ण मित्र देश है और दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास मजबूत है। उनके मुताबिक इस विषय पर स्थिति जल्द ही स्पष्ट हो सकती है और आने वाले समय में भारतीय जहाजों के लिए सुरक्षित आवाजाही की व्यवस्था की जा सकती है।
साझा क्षेत्रीय हितों की बात
राजदूत फतहाली ने यह भी कहा कि भारत और ईरान के कई क्षेत्रीय हित समान हैं। दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक स्तर पर लंबे समय से सहयोग जारी है।
उनके अनुसार भारत और ईरान ने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं और क्षेत्रीय मुद्दों पर साथ मिलकर काम किया है। यही कारण है कि मौजूदा हालात में भी दोनों देशों के रिश्तों में विश्वास और सहयोग की भावना बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के हित में है और इसी वजह से समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित होने से बचाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
लंबे समय से मजबूत संबंध
ईरानी राजदूत ने अपने बयान में भारत और ईरान के ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध केवल कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सांस्कृतिक, आर्थिक और व्यापारिक सहयोग भी लंबे समय से जारी है।
उनके अनुसार दोनों देशों के बीच भरोसे का रिश्ता इतना मजबूत है कि कठिन परिस्थितियों में भी सहयोग जारी रहता है। इसी भरोसे के कारण दोनों देश क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक सहयोग को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास करते रहे हैं।
मुश्किल समय में भारत का सहयोग
फतहाली ने यह भी कहा कि भारत ने कई कठिन समय में ईरान का साथ दिया है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में ईरान को सहयोग प्रदान किया है और कई बार अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद दोनों देशों ने सहयोग की भावना बनाए रखी है।
उनके मुताबिक युद्ध और संघर्ष के बाद की परिस्थितियों में भी भारत ने सकारात्मक भूमिका निभाई है, जिससे दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत हुए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य की रणनीतिक अहमियत
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह संकरा समुद्री रास्ता पर्शियन गल्फ को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
दुनिया के तेल व्यापार का एक बड़ा प्रतिशत इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। इसलिए यहां किसी भी प्रकार की सैन्य या राजनीतिक तनाव की स्थिति का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और व्यापार पर तुरंत दिखाई देता है।
भारत के लिए भी यह समुद्री मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपने कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है।
वैश्विक व्यापार पर पड़ता है असर
अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की रुकावट आती है तो उसका असर केवल तेल की आपूर्ति तक सीमित नहीं रहता। इससे वैश्विक व्यापार, शिपिंग उद्योग और ऊर्जा बाजार पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
इसी वजह से दुनिया के कई देश और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां इस क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
संघर्ष के बीच बढ़ी निगरानी
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की गतिविधियों पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है। कई देशों ने अपने जहाजों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाए हैं।
ऐसे माहौल में ईरान के राजदूत का यह बयान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि भारत और ईरान के बीच समुद्री व्यापार और जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित रखने के लिए सहयोग जारी रह सकता है।
अगर भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग मिलता है तो यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण राहत साबित हो सकता है।

