Iran Protests: ईरान में दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों को लेकर बेहद चौंकाने वाले और गंभीर दावे सामने आए हैं। महंगाई, बेरोजगारी और रियाल की गिरती कीमत के खिलाफ शुरू हुए ये प्रदर्शन जल्द ही सरकार विरोधी आंदोलन में बदल गए। प्रदर्शनकारियों ने खुले तौर पर सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ नारे लगाए, जिसके बाद सुरक्षा बलों की ओर से कड़ी कार्रवाई की गई।
अब विभिन्न रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि इन प्रदर्शनों को कुचलने के दौरान 16,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3 लाख से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि अभी मुश्किल है, लेकिन अगर ये सही साबित होते हैं तो यह ईरान के इतिहास की सबसे भीषण घटनाओं में से एक होगी।
डॉक्टरों की रिपोर्ट से सनसनी
जमीन पर मौजूद डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के हवाले से तैयार रिपोर्टों में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शनकारियों पर सीधे सिर, गर्दन और छाती में गोलियां मारी गईं। कहा जा रहा है कि अधिकतर पीड़ित 30 साल से कम उम्र के युवा थे।
इन रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि दमन के लिए सैन्य-ग्रेड हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जिससे बड़ी संख्या में मौतें हुईं।
जर्मन-ईरानी नेत्र सर्जन प्रोफेसर अमीर परस्ता ने मौजूदा हालात को “डिजिटल अंधेरे की आड़ में किया गया नरसंहार” बताया है। उनके अनुसार तेहरान के बड़े अस्पतालों में हजारों लोगों की आंखों में गंभीर चोटें दर्ज की गईं। अनुमान है कि 700 से 1,000 लोगों ने अपनी आंखों की रोशनी तक खो दी है।
कुछ मामलों में यह भी आरोप लगाए गए हैं कि घायलों को समय पर इलाज नहीं मिला और ब्लड ट्रांसफ्यूजन तक की अनुमति नहीं दी गई, जिससे कई लोगों की मौत हो गई।
अलग-अलग आंकड़े, भ्रम की स्थिति
हालांकि इन दावों को लेकर अलग-अलग स्रोतों से अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं। अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन HRANA ने अब तक लगभग 3,300 मौतों की पुष्टि की है और 24,000 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी की बात कही है।
वहीं कुछ ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अब तक कुल मौतों की संख्या लगभग 5,000 के आसपास है, जिनमें करीब 500 सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं।
भले ही वास्तविक संख्या को लेकर मतभेद हों, लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि यह अशांति 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान का सबसे घातक आंतरिक संकट बन चुकी है।
सरकार का पक्ष
ईरानी सरकार इन आरोपों को खारिज कर रही है। प्रशासन का कहना है कि हिंसा के लिए “आतंकवादी तत्व और हथियारबंद दंगाई” जिम्मेदार हैं।
सुप्रीम लीडर खामेनेई ने स्पष्ट कहा है कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन देश में अशांति फैलाने वालों को कड़ी सजा दी जाएगी। न्यायपालिका ने ‘मोहरेब’ जैसे गंभीर अपराधों में फांसी की सजा दिए जाने की चेतावनी भी दी है।
अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन घटनाओं पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों की हत्याएं और सामूहिक फांसी जारी रही तो अमेरिका हस्तक्षेप कर सकता है।
ट्रंप ने ईरान में नए नेतृत्व की जरूरत पर जोर दिया है, जबकि खामेनेई ने अमेरिका और इजरायल पर हिंसा भड़काने की साजिश रचने का आरोप लगाया है।
हालात की सही तस्वीर साफ नहीं
कुर्द बहुल उत्तर-पश्चिमी इलाकों में सबसे ज्यादा हिंसा की खबरें सामने आई हैं। लेकिन कई हफ्तों से जारी इंटरनेट ब्लैकआउट और मीडिया प्रतिबंधों के कारण जमीनी हालात की स्वतंत्र पुष्टि करना बेहद मुश्किल हो गया है।
भले ही कड़ी कार्रवाई के बाद प्रदर्शन कुछ हद तक धीमे पड़ गए हों, लेकिन ईरान का राजनीतिक और सामाजिक संकट अब भी गंभीर और अनिश्चित बना हुआ है।

