ईरान में हिंसक प्रदर्शन: हजारों मौतों का दावा, खौफनाक हालात

Iran protests
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Iran protests: ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। देश के कई शहरों में भड़की हिंसा के बाद अब हजारों लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है। तेहरान के काहरिज़क फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट के पास एक खुले मैदान में बड़ी संख्या में शव पड़े होने के दावे सामने आए हैं, जिससे स्थिति की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यह इलाका पूरी तरह शवों से भरा हुआ दिखाई दे रहा है। हालांकि, देश में इंटरनेट और संचार सेवाएं बंद होने के कारण इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना फिलहाल मुश्किल है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान डॉयचे वेले (DW) से बातचीत में हाल ही में ईरान से लौटे एक व्यक्ति ने दावा किया कि हिंसा में हजारों लोग मारे जा चुके हो सकते हैं।

उस व्यक्ति ने बताया कि वह अपने एक दोस्त के साथ उसकी पत्नी का शव लेने काहरिज़क फॉरेंसिक केंद्र गया था। महिला सरकार विरोधी प्रदर्शन में शामिल थी और कथित तौर पर सुरक्षा बलों की गोलीबारी में मारी गई। उसके अनुसार, फॉरेंसिक केंद्र के आसपास का माहौल बेहद डरावना था और हर तरफ मौत का मंजर दिखाई दे रहा था।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, प्रदर्शन से एक रात पहले इलाके में लगातार स्वचालित हथियारों से गोलीबारी की आवाजें सुनाई दे रही थीं। इसके बाद बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की खबरें सामने आईं और धीरे-धीरे शवों के फॉरेंसिक केंद्र पहुंचने की सूचनाएं मिलने लगीं।

ईरान में ये विरोध प्रदर्शन पिछले दो हफ्तों से अधिक समय से जारी हैं। लेकिन सरकार द्वारा इंटरनेट बंद किए जाने के कारण बाहरी दुनिया तक सटीक जानकारी पहुंच पाना बेहद कठिन हो गया है। कई इलाकों में फोन सेवाएं भी ठप हैं, जिससे देश के अंदर की असल तस्वीर सामने नहीं आ पा रही है।

कुछ वीडियो और तस्वीरें स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट या तस्करी के जरिए देश के बाहर भेजी जा रही हैं। इन्हीं के माध्यम से दुनिया को ईरान के हालात की झलक मिल पा रही है। इन वीडियो में सड़कों पर हिंसा, गोलीबारी और भारी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती साफ देखी जा सकती है।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बात करते हुए एक ईरानी अधिकारी ने मंगलवार को दावा किया कि अब तक 2500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं नॉर्वे स्थित संगठन “ईरान ह्यूमन राइट्स” ने बुधवार को मृतकों की संख्या कम से कम 3,379 बताई है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि वास्तविक आंकड़ा 12,000 से भी ज्यादा हो सकता है।

इसके अलावा, अब तक 10,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। मानवाधिकार संगठनों को डर है कि इनमें से कई लोगों पर फर्जी मुकदमे चलाकर उन्हें कड़ी सजा, यहां तक कि मौत की सजा भी दी जा सकती है।

सरकार समर्थक मीडिया लगातार प्रदर्शनकारियों को “आतंकवादी” और “विदेशी एजेंट” बताकर उनके खिलाफ माहौल बना रहा है। ईरान के न्याय मंत्री अमीन हुसैन रहीमी ने हाल ही में गिरफ्तार लोगों को “अपराधी” करार दिया और सख्त कार्रवाई की बात कही।

प्रदर्शनों को दबाने के लिए पुलिस के साथ-साथ बसीज नामक अर्धसैनिक संगठन को भी तैनात किया गया है। यह संगठन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अधीन काम करता है और सीधे सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के प्रति जवाबदेह माना जाता है।

बसीज बल को कट्टरपंथी विचारधारा के प्रति बेहद वफादार माना जाता है और इससे पहले भी कई प्रदर्शनों को कुचलने में इसकी भूमिका विवादों में रही है। मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलीबारी कर रहे हैं और उन्हें क्रूरता से कुचला जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार ईरान सरकार से हिंसा रोकने और मानवाधिकारों का सम्मान करने की अपील कर रहा है। लेकिन फिलहाल हालात काबू में आते नहीं दिख रहे और देश में तनाव चरम पर बना हुआ है।