Iran Nuclear Program पर इटली की चेतावनी, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

Iran Nuclear Program
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Iran Nuclear Program: मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते तनाव के बीच इटली ने ईरान को सख्त संदेश देते हुए उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर गंभीर चिंता जताई है। इटली के विदेश मंत्री Antonio Tajani ने ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi से फोन पर बातचीत के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि ईरान का सैन्य परमाणु कार्यक्रम एक “रेड लाइन” है, जिसे पार करना पूरे क्षेत्र के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

ताजानी ने चेतावनी दी कि अगर ईरान परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ता है, तो इससे मध्य पूर्व में हथियारों की नई और खतरनाक होड़ शुरू हो सकती है। उन्होंने इस स्थिति को न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक शांति के लिए भी बड़ा खतरा बताया। बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी दोहराया कि मौजूदा संकट का समाधान केवल कूटनीति और संवाद के जरिए ही संभव है, न कि सैन्य टकराव से।

इटली ने खास तौर पर Strait of Hormuz का मुद्दा उठाया, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। ताजानी ने कहा कि इस जलडमरूमध्य का खुला रहना बेहद जरूरी है, क्योंकि यहां किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने यह भी चेताया कि इसका असर खाद्य सुरक्षा पर पड़ेगा, खासकर अफ्रीकी देशों में, जहां पहले से ही आर्थिक चुनौतियां मौजूद हैं।

इसी दौरान इटली ने ईरान से यह अपील भी की कि वह Hezbollah पर दबाव बनाए, ताकि वह इजराइल पर हमले बंद करे और लेबनान में शांति बहाल हो सके। इटली का मानना है कि क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए सभी पक्षों को संयम बरतने की जरूरत है।

दूसरी ओर, ईरान ने कूटनीतिक मोर्चे पर एक बड़ा कदम उठाते हुए 14 बिंदुओं का शांति प्रस्ताव पेश किया है। ईरानी मीडिया Tasnim News Agency के मुताबिक, इस प्रस्ताव का उद्देश्य 30 दिनों के भीतर सभी संघर्षों को समाप्त करना है। इस योजना में कई अहम मांगें शामिल हैं, जैसे अमेरिका की सेनाओं की वापसी, समुद्री नाकेबंदी का अंत, विदेशों में जमा ईरानी संपत्तियों को खोलना और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाना।

ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने बताया कि यह प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका तक पहुंचाया गया है। अब इस पर अंतिम निर्णय अमेरिका को लेना है। हालांकि, अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने इस प्रस्ताव पर असंतोष जताया है। उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत करना चाहता है, लेकिन मौजूदा प्रस्ताव उनकी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता।

कुल मिलाकर, स्थिति बेहद जटिल बनी हुई है। एक तरफ कूटनीतिक प्रयास तेज हो रहे हैं, तो दूसरी ओर अविश्वास और तनाव भी लगातार बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या ये बातचीत किसी ठोस समाधान तक पहुंचेगी या फिर मध्य पूर्व एक और बड़े संकट की ओर बढ़ेगा।