Iran Israel War: 7 दिन में 1332 मौतें, हजारों घर तबाह

Iran Israel War
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Iran Israel War: मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-इजरायल संघर्ष ने सातवें दिन और भी भयावह रूप ले लिया है। लगातार हो रही बमबारी और मिसाइल हमलों के कारण ईरान में भारी तबाही देखने को मिल रही है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार अब तक इस युद्ध में ईरान में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,332 हो गई है, जबकि 3,000 से अधिक घर पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि कई शहरों में आम नागरिकों के लिए जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।

तेहरान में तबाही की रात

शुक्रवार की रात ईरान की राजधानी तेहरान के लिए बेहद खौफनाक साबित हुई। शहर के पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी इलाकों में देर रात लगातार धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। बमबारी इतनी तीव्र थी कि कई किलोमीटर दूर तक इमारतों के शीशे टूट गए और जमीन कांपने जैसी स्थिति बन गई।

हमलों का सबसे ज्यादा असर तेहरान विश्वविद्यालय के आसपास के रिहायशी इलाकों में देखा गया। कई इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं और सैकड़ों लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हो गए।

ईरान के अन्य शहर भी इस युद्ध की चपेट में आ चुके हैं। शिराज के जीबाशहर इलाके में हुए एक हमले में एक साथ 20 लोगों की मौत हो गई, जिससे पूरे इलाके में मातम का माहौल है। इसके अलावा इस्फ़हान और करमनशाह जैसे महत्वपूर्ण शहरों में भी आग और धुएं के गुबार देखे जा रहे हैं।

‘पेनिट्रेटर’ बमों का इस्तेमाल

रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका और इजरायल ने अब इस सैन्य अभियान के दूसरे चरण यानी “फेज-2” की शुरुआत कर दी है। इस चरण का उद्देश्य ईरान के सैन्य ढांचे और मिसाइल क्षमता को गंभीर रूप से कमजोर करना बताया जा रहा है।

अमेरिकी सेना ने इसके लिए अत्याधुनिक बी-2 स्टील्थ बॉम्बर्स का इस्तेमाल किया है। इन विमानों से जमीन के अंदर गहराई में छिपे मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाने के लिए करीब 2,000 पाउंड वजनी ‘पेनिट्रेटर बम’ गिराए जा रहे हैं।

दूसरी ओर, इजरायल की सेना ने भी दावा किया है कि उसने ईरान के छह प्रमुख मिसाइल लॉन्चर्स और कई रक्षा प्रणालियों को नष्ट कर दिया है। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का कहना है कि यह सैन्य अभियान अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में फाइटर जेट्स और बॉम्बर विमानों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।

बच्चों की मौत से दुनिया स्तब्ध

इस युद्ध का सबसे दर्दनाक पहलू आम नागरिकों और बच्चों की मौत है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अब तक मरने वालों में 181 बच्चे भी शामिल हैं। बच्चों की मौत की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को झकझोर दिया है।

संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी एजेंसी यूनिसेफ के अनुसार ईरान के मीनाब शहर में एक गर्ल्स स्कूल पर हुए हमले में कई छात्राओं की जान चली गई। इस घटना ने पूरे देश में गहरा आक्रोश और दुख पैदा कर दिया है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पूरे ईरान में अब तक 3,000 से ज्यादा घर पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं। इसके अलावा 14 अस्पताल भी क्षतिग्रस्त या मलबे में तब्दील हो गए हैं, जिससे घायल लोगों के इलाज में गंभीर दिक्कतें आ रही हैं।

दूसरी ओर इजरायल में भी इस संघर्ष का असर दिखाई दे रहा है। वहां अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है और कई नागरिक अस्पतालों में भर्ती हैं।

बहरीन तक पहुंची जंग की आंच

इस युद्ध की आग अब खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों तक भी पहुंचने लगी है। बहरीन ने दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान की ओर से दागे गए 78 मिसाइलों और 143 ड्रोन को मार गिराया है।

बहरीन सरकार ने इसे ईरान का “विश्वासघाती कदम” बताते हुए क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया है। इस घटना के बाद खाड़ी देशों में तनाव और भी बढ़ गया है।

जमीनी युद्ध पर अनिश्चितता

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने फिलहाल जमीनी सेना भेजने से इनकार किया है। उनका कहना है कि ईरान की नौसैनिक और सैन्य क्षमता काफी कमजोर हो चुकी है, इसलिए पैदल सेना भेजना रणनीतिक रूप से जरूरी नहीं है।

हालांकि ईरान ने इस बयान का कड़ा जवाब देते हुए कहा है कि अगर अमेरिका ने जमीनी युद्ध शुरू किया तो यह उसके लिए “ऐतिहासिक आपदा” साबित होगा।

इसी बीच एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक मीनाब के जिस स्कूल पर हमला हुआ, वह संभवतः अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की गलती भी हो सकती है। यदि यह आरोप सही साबित होता है तो इसे आधुनिक इतिहास के सबसे गंभीर युद्ध अपराधों में गिना जा सकता है।

मिडिल ईस्ट में जारी यह संघर्ष फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है और दुनिया भर की नजरें अब आने वाले दिनों की घटनाओं पर टिकी हुई हैं।