Iran War Update: ईरान ने भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान और इराक सहित पांच “मित्र देशों” को होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से वाणिज्यिक नौवहन की अनुमति दे दी है। यह जानकारी ईरानी विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने दी। होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच एक संकरा समुद्री मार्ग है, जो वैश्विक तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत परिवहन करता है।
हाल के सप्ताहों में, ईरान द्वारा इस मार्ग को अवरुद्ध करने की चेतावनी ने अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस बाजार में उछाल ला दिया था। भारत सहित कई देश इस मार्ग पर निर्भर हैं, क्योंकि पश्चिम एशिया से आने वाला कच्चा तेल और LNG भारतीय ऊर्जा जरूरतों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
ईरान का बयान
ईरानी सरकारी टेलीविजन की रिपोर्ट के अनुसार, अराघची ने कहा, “हमने कुछ ऐसे देशों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी है जिन्हें हम मित्र मानते हैं। इसमें चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान शामिल हैं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान के शत्रुओं और उनके सहयोगियों से जुड़े पोतों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
अराघची ने कहा, “हम युद्ध की स्थिति में हैं और यह क्षेत्र युद्ध क्षेत्र बना हुआ है। इसलिए हमारे दुश्मनों और उनके सहयोगियों के पोतों को इस मार्ग से गुजरने देने का कोई कारण नहीं है, लेकिन मित्र देशों के लिए यह सुरक्षित और खुला है।”
वैश्विक और क्षेत्रीय असर
होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने या अवरुद्ध करने की संभावनाओं ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर यह जलमार्ग पूरी तरह खुला नहीं रखा गया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
भारत ने इस समय पश्चिम एशिया में सक्रिय कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। भारत का उद्देश्य है कि क्षेत्रीय संघर्ष जल्द से जल्द समाप्त हो और होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति निर्बाध बनी रहे। भारत की नजर इस पर है कि अगर मार्ग पर अवरोध बना रहा, तो न केवल ईंधन बल्कि उर्वरक की आपूर्ति पर भी गंभीर असर पड़ सकता है, जो देश की कृषि और आर्थिक सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकता है।
भारत की रणनीति
पिछले कुछ हफ्तों में, भारत ने ईरान, अमेरिका और अन्य क्षेत्रीय खिलाड़ियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा। भारत की रणनीति यह सुनिश्चित करने की रही कि होर्मुज मार्ग से कच्चे तेल और LNG का निर्बाध आवागमन हो। इसके तहत भारत ने मित्र देशों के पोतों की सुरक्षा और मार्ग की निगरानी बढ़ाने के लिए कूटनीतिक चैनलों का उपयोग किया।
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान द्वारा मित्र देशों को मार्ग खोलने का निर्णय क्षेत्रीय और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इससे न केवल भारत, बल्कि चीन, रूस, पाकिस्तान और इराक को भी अपने वाणिज्यिक संचालन को सुरक्षित रखने का अवसर मिलेगा। हालांकि, तनाव अभी खत्म नहीं हुआ है, क्योंकि इस क्षेत्र में संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर जारी है।
निष्कर्ष
ईरान का यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीति में एक अहम संकेत है। यह दिखाता है कि ईरान कुछ देशों के साथ सहयोग जारी रखना चाहता है जबकि अपने प्रतिद्वंद्वियों को प्रतिबंधित रखेगा। भारत के लिए यह राहत की खबर है, क्योंकि यह देश अपनी ऊर्जा और कृषि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस मार्ग पर निर्भर है।

