Hormuz Strait: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और समुद्री मार्गों पर संभावित हमलों की आशंका ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच भारत ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए अहम कूटनीतिक कदम उठाया है। रिपोर्टों के अनुसार भारत सरकार ने अमेरिका के साथ समुद्री सुरक्षा सहयोग को लेकर बातचीत शुरू की है, ताकि मध्य पूर्व से आने वाले तेल और गैस के जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
भारत की चिंता मुख्य रूप से उन समुद्री मार्गों को लेकर है, जिनसे होकर देश के लिए ऊर्जा आपूर्ति होती है। अगर इन रास्तों पर किसी तरह का हमला या बाधा आती है तो इसका सीधा असर भारत की ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।
अमेरिका से सुरक्षा सहयोग पर चर्चा
सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारत ने अमेरिका के साथ इस बात पर चर्चा की है कि अगर पश्चिम एशिया में हालात और बिगड़ते हैं तो अमेरिकी नौसेना तेल और गैस लेकर आने वाले जहाजों को सुरक्षा प्रदान कर सकती है। यह कदम खास तौर पर उन संवेदनशील समुद्री मार्गों के लिए जरूरी माना जा रहा है जहां से बड़ी मात्रा में ऊर्जा आपूर्ति दुनिया भर में पहुंचती है।
इस संदर्भ में भारत की नजर खासतौर पर Strait of Hormuz पर है, जो वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का वैश्विक महत्व
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे रणनीतिक समुद्री मार्गों में गिना जाता है। इस संकरे रास्ते से दुनिया के कुल तेल और गैस व्यापार का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला अधिकांश कच्चा तेल इसी रास्ते से एशिया, यूरोप और अन्य क्षेत्रों तक पहुंचता है।
हाल के महीनों में Iran, Israel और United States के बीच बढ़ते तनाव ने इस क्षेत्र को बेहद संवेदनशील बना दिया है। सैन्य गतिविधियों में वृद्धि और संभावित समुद्री हमलों की आशंका के कारण यहां से गुजरने वाले तेल टैंकरों और गैस जहाजों की सुरक्षा को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ गई है।
समुद्री व्यापार की सुरक्षा पर अमेरिका का कदम
अमेरिका ने भी समुद्री व्यापार की सुरक्षा को लेकर कुछ अहम कदम उठाए हैं। अमेरिकी प्रशासन ने अपनी एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे समुद्री व्यापार से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए वित्तीय सहायता और राजनीतिक जोखिम बीमा उपलब्ध कराएं।
इसके अलावा संकेत दिए गए हैं कि यदि स्थिति और गंभीर होती है तो अमेरिकी नौसेना जहाजों को सुरक्षा प्रदान करते हुए उन्हें सुरक्षित रूप से इस संवेदनशील समुद्री मार्ग से गुजरने में मदद कर सकती है।
भारत के लिए मध्य पूर्व क्यों जरूरी
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व से आयात करता है। देश के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। इसके अलावा घरेलू उपयोग में आने वाली रसोई गैस यानी एलपीजी की लगभग 85 से 90 प्रतिशत आपूर्ति भी खाड़ी देशों से होती है।
ऐसे में अगर इस क्षेत्र में युद्ध या समुद्री मार्गों में बाधा आती है तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसी वजह से सरकार इस पूरे घटनाक्रम पर करीब से नजर बनाए हुए है।
वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तलाश
संभावित ऊर्जा संकट से निपटने के लिए भारत अब अलग-अलग देशों और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनियों के साथ बातचीत कर रहा है। सरकार का प्रयास है कि तेल और गैस की आपूर्ति के लिए नए विकल्प तैयार किए जाएं, ताकि किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता कम हो सके।
इस रणनीति के तहत भारत विभिन्न देशों से ऊर्जा आयात बढ़ाने और दीर्घकालिक समझौते करने पर भी विचार कर रहा है।
ऊर्जा क्षेत्र पर दिखने लगा असर
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब धीरे-धीरे भारत के ऊर्जा क्षेत्र में भी दिखाई देने लगा है। कुछ कंपनियों ने एहतियात के तौर पर ईंधन निर्यात को अस्थायी रूप से रोक दिया है, जबकि कुछ रिफाइनरी इकाइयों ने अपना उत्पादन सीमित कर दिया है।
इसके अलावा गैस आपूर्ति में भी कमी देखी जा रही है, जिससे ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है।
गैस सप्लाई में कमी
भारत के प्रमुख गैस आपूर्तिकर्ता देशों में शामिल Qatar से आने वाली गैस की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। समुद्री मार्गों में सुरक्षा चिंताओं के कारण भारत को मिलने वाली गैस की मात्रा में कमी आई है।
रिपोर्ट के अनुसार देश को प्रतिदिन मिलने वाली गैस में लगभग 60 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर की कमी देखी जा रही है।
सरकार की आपूर्ति रणनीति
यदि पश्चिम एशिया में हालात और बिगड़ते हैं तो भारत सरकार गैस और ऊर्जा आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों में बांटने की योजना बना सकती है। इसमें बिजली उत्पादन, घरेलू गैस और जरूरी उद्योगों को सबसे पहले ऊर्जा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। ऐसे में भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।

