भारत–रूस रक्षा साझेदारी में बड़ी छलांग: परमाणु सबमरीन लीज़ डील पुतिन की यात्रा से पहले फाइनल

Defence News
Defence News

Defence News India: भारत और रूस के रणनीतिक संबंध एक बार फिर महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुँच गए हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा से पहले दोनों देशों ने एक बड़ी रक्षा डील को अंतिम रूप दे दिया है, जिससे भारत की समुद्री और सैन्य क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने वाली है। लंबे समय से लंबित परमाणु-संचालित हमला करने वाली पनडुब्बी (Nuclear Attack Submarine) की लीज़ पर दोनों देशों ने सहमति बना ली है।

सूत्रों के अनुसार, भारत लगभग 2 अरब डॉलर के भुगतान पर रूस से यह न्यूक्लियर सबमरीन किराए पर लेगा। यह वही परियोजना है जो पिछले करीब दस वर्षों से कीमत और तकनीकी बिंदुओं पर अटकी हुई थी। अब दोनों पक्षों ने सभी मुद्दों पर सहमति बनाकर इसे आधिकारिक हरी झंडी दे दी है।

कई वर्षों से अटकी बातचीत में बनी सहमति

नवंबर में भारतीय नौसेना और रक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने रूस के प्रमुख शिपयार्ड का दौरा किया था। इसी निरीक्षण के बाद दोनों पक्षों में अंतिम बातचीत आगे बढ़ी और डील को औपचारिक रूप से पूरा कर लिया गया। उम्मीद है कि अगली दो वर्षों में भारत को यह पनडुब्बी मिल जाएगी, हालांकि जटिल तकनीकी प्रक्रियाओं के कारण समयसीमा आगे बढ़ने की संभावना भी बनी रहेगी।

सैन्य संतुलन में बड़ा बदलाव

इस समझौते से भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और निगरानी क्षमता कई गुना बेहतर होगी। हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक पकड़ और मजबूत होगी, वहीं उत्तरी सीमाओं पर भी देश की प्रतिरोध क्षमता में उल्लेखनीय इजाफा होगा। भारत पहले भी रूस से ‘चक्र’ नामक परमाणु पनडुब्बी किराए पर ले चुका है, और यह नया समझौता उस रक्षा सहयोग को और आगे बढ़ाता है।

मोदी सरकार की रणनीति और अंतरराष्ट्रीय संकेत

डील ऐसे समय में हुई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच संतुलित विदेश नीति पर जोर दे रहे हैं। अमेरिका द्वारा हाल ही में भारत पर 50% तक के दंडात्मक शुल्क लगाए जाने के बाद भी भारत ने रूस और चीन दोनों के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों को मज़बूत करने का संकेत दिया है।

भारत और अमेरिका के बीच ऊँचे टैरिफ कम करने पर बातचीत जारी है। यह वही शुल्क है जो अमेरिका ने भारत पर रूस से सस्ती कच्चे तेल की खरीद जारी रखने के चलते दबाव बनाने के लिए लगाए थे।

इस नई रक्षा डील ने यह साफ कर दिया है कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर किसी भी प्रकार के बाहरी दबाव से समझौता करने के पक्ष में नहीं है।