Middle East crisis: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और तेल आपूर्ति में आ रही बाधाओं के बीच India की भूमिका पूरे दक्षिण एशिया में और अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है। वैश्विक ऊर्जा संकट के इस दौर में पड़ोसी देश भारत की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। हाल ही में Bangladesh और Nepal जैसे देशों ने अतिरिक्त ईंधन की आपूर्ति के लिए भारत से अनुरोध किया है।
बांग्लादेश और नेपाल की बढ़ी मांग
रिपोर्ट्स के अनुसार, Bangladesh ने भारत से पहले से तय समझौते के तहत मिलने वाले 1.8 लाख टन डीजल के अलावा अतिरिक्त ईंधन की मांग की है।
दूसरी ओर, Nepal ने Indian Oil Corporation से करीब 3,000 टन अतिरिक्त LPG की मांग रखी है।
हालांकि, फिलहाल भारत ने तय मात्रा से अधिक सप्लाई देने से इनकार कर दिया है। नेपाल को मौजूदा समझौते के तहत हर महीने लगभग 48,000 टन LPG की आपूर्ति पहले से ही की जा रही है।
भारत का संतुलित रुख
इस मुद्दे पर Randhir Jaiswal ने कहा कि भारत इन सभी अनुरोधों की गंभीरता से समीक्षा कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी फैसला देश की अपनी ऊर्जा जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखते हुए ही लिया जाएगा।
भारत का यह रुख दिखाता है कि वह एक ओर अपने पड़ोसी देशों की मदद करना चाहता है, वहीं दूसरी ओर अपने घरेलू हितों को भी सुरक्षित रखना चाहता है।
मिडिल ईस्ट संकट का असर
मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष और Strait of Hormuz में बाधाओं के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां किसी भी प्रकार की रुकावट का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है।
इस संकट के चलते दक्षिण एशियाई देशों में ईंधन की कमी का खतरा बढ़ गया है और वैकल्पिक सप्लाई रूट खोजना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
भारत की मजबूत रणनीति
India, जो दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर है, ने इस संकट से निपटने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, देश में फिलहाल पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार मौजूद है और रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं।
भारत ने हालात को नियंत्रित रखने के लिए:
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Russia से लगभग 30 मिलियन बैरल कच्चे तेल की खरीद की
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Iran के साथ जहाजों की सुरक्षित आवाजाही पर बातचीत की
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20 से ज्यादा टैंकरों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने की कोशिश की
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United States सहित कई देशों से LPG का आयात शुरू किया
इन कदमों से यह साफ है कि भारत न केवल अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभा सकता है।
क्या भारत बनेगा क्षेत्र का ‘एनर्जी बैकअप’?
मौजूदा हालात को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि भारत आने वाले समय में दक्षिण एशिया के लिए एक ‘एनर्जी बैकअप’ के रूप में उभर सकता है।
हालांकि, इसके लिए जरूरी है कि भारत अपनी घरेलू जरूरतों और निर्यात के बीच सही संतुलन बनाए रखे।
आगे की राह
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव कब खत्म होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में भारत जैसे देशों की भूमिका और भी अहम हो जाती है, जो संकट के समय अपने पड़ोसियों के लिए सहारा बन सकते हैं।
भारत का संतुलित और रणनीतिक दृष्टिकोण न केवल उसकी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करता है, बल्कि उसे एक जिम्मेदार क्षेत्रीय शक्ति के रूप में भी स्थापित करता है।

