Hormuz crisis: होर्मुज संकट पर 35 देशों की बैठक, जहाज निकालने की तैयारी

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Hormuz crisis: हॉर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुए गंभीर संकट को सुलझाने के लिए अब दुनिया भर के देश एकजुट होते नजर आ रहे हैं। ईरान युद्ध के कारण इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के लगभग बंद हो जाने से वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ऐसे में ब्रिटेन ने इस मुद्दे पर 35 देशों की एक अहम बैठक—Hormuz Summit—बुलाई है, जिसमें भारत को भी आमंत्रित किया गया है।

इस पहल का नेतृत्व कीर स्टार्मर कर रहे हैं, जबकि बैठक का संचालन यवेट कूपर द्वारा किया जा रहा है। इस समिट का मुख्य उद्देश्य है—समुद्र में फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालना और बिना किसी सैन्य टकराव के इस रणनीतिक मार्ग को दोबारा खोलना।

भारत की सक्रिय भागीदारी

भारत इस संकट को लेकर पूरी तरह सक्रिय है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पुष्टि की है कि भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी इस बैठक में वर्चुअल माध्यम से हिस्सा ले रहे हैं।

भारत लगातार ईरान और अन्य प्रभावित देशों के साथ संपर्क में बना हुआ है ताकि भारतीय जहाजों और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। हालिया जानकारी के अनुसार, बातचीत के बाद 6 भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से हॉर्मुज पार कर चुके हैं, जबकि बाकी जहाजों को निकालने के प्रयास जारी हैं।

क्यों गंभीर है यह संकट?

हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाला बड़ा हिस्सा कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है।

लेकिन ईरान युद्ध के चलते इस मार्ग पर आवाजाही लगभग ठप हो गई है। कई तेल टैंकर और मालवाहक जहाज बीच समुद्र में फंसे हुए हैं, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पर भारी दबाव पड़ा है।

इसका सबसे ज्यादा असर भारत, चीन, जापान, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे देशों पर पड़ा है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर निर्भर हैं।

कूटनीतिक समाधान पर जोर

ब्रिटेन ने इस संकट के समाधान के लिए सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक रास्ता अपनाने का फैसला किया है। समिट के पहले चरण में राजनीतिक और राजनयिक उपायों पर चर्चा की जा रही है, ताकि बिना संघर्ष के स्थिति को सामान्य किया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मुद्दे का समाधान बातचीत के जरिए नहीं निकाला गया, तो यह वैश्विक स्तर पर बड़े आर्थिक संकट का कारण बन सकता है।

अमेरिका का रुख और दबाव

इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर कई बार बयान दिए हैं। उन्होंने कहा है कि जिन देशों का व्यापार इस मार्ग पर निर्भर है, उन्हें खुद आगे आकर इसे सुरक्षित बनाने की जिम्मेदारी उठानी चाहिए।

ट्रंप ने नाटो और ब्रिटेन पर भी दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन ब्रिटेन ने साफ कर दिया है कि वह सैन्य टकराव से बचते हुए कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देगा।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा

हॉर्मुज संकट अब केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक चिंता का विषय बन चुका है। तेल सप्लाई में बाधा से कीमतों में उछाल आ सकता है, जिससे महंगाई बढ़ेगी और कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।

आगे की राह

दुनिया के 35 देशों की यह बैठक इस बात का संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस संकट को गंभीरता से ले रहा है। अब यह देखना अहम होगा कि क्या यह वैश्विक पहल सफल होती है और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा सुरक्षित रूप से खोला जा सकता है।

फिलहाल, दुनिया की नजर इस समिट के नतीजों पर टिकी हुई है।