France News: फ्रांस में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही को लेकर सख्ती बढ़ती जा रही है। इसी कड़ी में एलन मस्क के स्वामित्व वाले सोशल मीडिया मंच ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) के फ्रांस स्थित कार्यालयों पर पेरिस के अभियोजकों ने छापेमारी की है। यह कार्रवाई बाल यौन सामग्री (चाइल्ड पोर्नोग्राफी), डीपफेक कंटेंट और अन्य गंभीर कथित अपराधों से जुड़ी एक शुरुआती जांच के तहत की गई है। फ्रांस की राजधानी पेरिस में मंगलवार को हुई इस छापेमारी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की भूमिका और जिम्मेदारी को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
पेरिस अभियोजक कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, इस मामले की जांच पिछले साल जनवरी में शुरू की गई थी। अभियोजक कार्यालय की साइबर अपराध इकाई इस जांच का नेतृत्व कर रही है। जांच के दायरे में बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री के प्रसार, उनसे संबंधित डीपफेक कंटेंट, मानवता के खिलाफ अपराधों और एक संगठित समूह के तहत ‘ऑटोमेटेड डेटा प्रोसेसिंग सिस्टम’ में कथित हेरफेर जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन मामलों में संभावित मिलीभगत की भी जांच की जा रही है।
बयान में यह भी बताया गया है कि अभियोजकों ने एलन मस्क और ‘X’ की 2023 से 2025 तक मुख्य कार्याधिकारी (CEO) रहीं लिंडा याकारिनो से स्वैच्छिक पूछताछ के लिए अनुरोध किया है। इसके लिए 20 अप्रैल की तारीख तय की गई है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर ‘X’ की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मीडिया द्वारा टिप्पणी के लिए किए गए अनुरोधों पर कंपनी के प्रवक्ता ने फिलहाल कोई जवाब नहीं दिया।
पेरिस अभियोजक कार्यालय ने यह स्पष्ट किया है कि इस चरण में जांच का उद्देश्य दंडात्मक कार्रवाई से पहले तथ्यों की गहन पड़ताल करना है। अभियोजकों के अनुसार, जांच “एक सकारात्मक सोच” पर आधारित है, जिसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ‘X’ फ्रांस के कानूनों का पूरी तरह पालन करे, क्योंकि यह प्लेटफॉर्म देश की सीमाओं के भीतर सक्रिय रूप से काम कर रहा है। फ्रांसीसी कानून डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से अपेक्षा करता है कि वे अवैध और हानिकारक सामग्री को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाएं।
इस जांच की शुरुआत एक फ्रांसीसी सांसद की रिपोर्ट के बाद हुई थी। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि ‘X’ पर मौजूद पक्षपातपूर्ण एल्गोरिदम प्लेटफॉर्म के ‘ऑटोमेटेड डेटा प्रोसेसिंग सिस्टम’ के कामकाज को प्रभावित कर सकते हैं। इसके चलते कुछ प्रकार की आपत्तिजनक या अवैध सामग्री को बढ़ावा मिलने की आशंका जताई गई थी। बाद में मिली अतिरिक्त रिपोर्ट्स के आधार पर जांच का दायरा और व्यापक किया गया।
इन रिपोर्ट्स में यह भी आरोप लगाया गया कि ‘X’ के एआई चैटबॉट ‘ग्रोक’ ने कथित तौर पर यहूदी नरसंहार (होलोकॉस्ट) से इनकार से जुड़ी बातें कही थीं और यौन सामग्री से संबंधित डीपफेक कंटेंट के प्रसार में भी उसकी भूमिका संदिग्ध रही है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
फ्रांस में यह कार्रवाई ऐसे समय पर हुई है, जब यूरोप भर में सोशल मीडिया और टेक कंपनियों पर नियामकीय दबाव लगातार बढ़ रहा है। यूरोपीय संघ के डिजिटल सर्विसेज एक्ट (DSA) के तहत प्लेटफॉर्म्स को अवैध कंटेंट हटाने और यूजर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य है। फ्रांसीसी अधिकारी इसी कानून के तहत यह परखना चाहते हैं कि ‘X’ ने अपनी जिम्मेदारियों का सही तरीके से निर्वहन किया है या नहीं।
कुल मिलाकर, ‘X’ के फ्रांस स्थित कार्यालयों पर हुई यह छापेमारी केवल एक कंपनी तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि यह संकेत देती है कि यूरोपीय देश डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को कानून से ऊपर नहीं मानने वाले। आने वाले समय में इस जांच के नतीजे सोशल मीडिया कंपनियों की नीतियों और उनके संचालन के तरीके पर गहरा असर डाल सकते हैं।

