Europe energy crisis: यूरोप में लंबे समय से जारी ऊर्जा संकट के बीच एक सकारात्मक और राहत देने वाली खबर सामने आई है। रूस से आने वाले तेल की आपूर्ति, जो Druzhba Pipeline के जरिए होती है, अब एक बार फिर यूक्रेन के रास्ते स्लोवाकिया तक पहुंचने लगी है। इस घटनाक्रम को यूरोपीय संघ की एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है, जिससे न केवल ऊर्जा आपूर्ति बहाल हुई है बल्कि क्षेत्रीय तनाव कम होने के संकेत भी मिले हैं।
स्लोवाकिया की वित्त मंत्री Denisa Saková ने पुष्टि की कि यूक्रेन से होकर गुजरने वाली इस पाइपलाइन के जरिए रूसी तेल की सप्लाई फिर से शुरू हो गई है। उन्होंने इसे देश के लिए एक बड़ी राहत बताया, क्योंकि पिछले कुछ महीनों से ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने के कारण आर्थिक और औद्योगिक दबाव बढ़ रहा था।
स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री Robert Fico ने भी इस घटनाक्रम का स्वागत करते हुए इसे “अच्छी खबर” करार दिया। उन्होंने कहा कि इस कदम से न केवल ऊर्जा संकट को कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि European Union और यूक्रेन के बीच संबंध और मजबूत होने की उम्मीद है। फिको ने इस समाधान में सहयोग देने के लिए यूरोपीय आयोग और हंगरी समेत सभी संबंधित पक्षों का आभार व्यक्त किया।
दरअसल, हंगरी और स्लोवाकिया के बीच यूक्रेन को लेकर विवाद तब शुरू हुआ था, जब जनवरी में पाइपलाइन के क्षतिग्रस्त होने के कारण तेल की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई थी। यूक्रेन के अधिकारियों ने इस नुकसान के लिए रूसी ड्रोन हमलों को जिम्मेदार ठहराया था। वहीं, हंगरी के प्रधानमंत्री Viktor Orbán ने आरोप लगाया था कि यूक्रेन ने जानबूझकर पाइपलाइन की मरम्मत में देरी की।
हालांकि, यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि उनका देश ऊर्जा आपूर्ति को बहाल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस पूरे घटनाक्रम ने यूरोप में पहले से ही चल रहे ऊर्जा संकट को और गहरा कर दिया था, क्योंकि रूस से आने वाली ऊर्जा पर कई यूरोपीय देश काफी हद तक निर्भर हैं।
प्रधानमंत्री फिको ने एक अलग दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि उन्हें अब भी यह नहीं लगता कि पाइपलाइन को वास्तव में कोई बड़ा नुकसान हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मुद्दे को मौजूदा भू-राजनीतिक संघर्ष के हिस्से के रूप में इस्तेमाल किया गया। उनके इस बयान से यह संकेत मिलता है कि ऊर्जा आपूर्ति सिर्फ तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति का भी हिस्सा बन चुकी है।
इस बीच, तेल सप्लाई के दोबारा शुरू होने से यूक्रेन के लिए भी राहत की खबर है। माना जा रहा है कि इससे उसे एक बड़े वित्तीय सहायता पैकेज तक पहुंच मिल सकती है, जो युद्ध से प्रभावित उसकी अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है। साथ ही, यह कदम यूरोप और यूक्रेन के बीच सहयोग को और मजबूत कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम यूरोप में ऊर्जा स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, क्षेत्र में जारी संघर्ष और राजनीतिक मतभेदों को देखते हुए स्थिति अभी भी पूरी तरह स्थिर नहीं कही जा सकती। लेकिन फिलहाल, इस सप्लाई के फिर से शुरू होने से ऊर्जा बाजार में कुछ हद तक संतुलन लौटने की उम्मीद जरूर जगी है।
कुल मिलाकर, यूक्रेन रूट के जरिए रूसी तेल की बहाली ने यूरोप को एक अस्थायी राहत जरूर दी है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए कूटनीतिक प्रयास और मजबूत ऊर्जा नीतियों की आवश्यकता बनी हुई है।

