चीन ने दिखाया सख्त रुख: अमेरिका पर मादुरो को “अगवा” करने का आरोप

Nicolas Maduro
Nicolas Maduro

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो (Nicolas Maduro) की अमेरिकी हिरासत को लेकर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। चीन ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि उसने एक संप्रभु देश के राष्ट्रपति को “गैरकानूनी तरीके से अगवा” किया है और इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताया। बीजिंग ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वाशिंगटन को मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को तुरंत रिहा करना चाहिए और वेनेजुएला संकट का समाधान हथियारों से नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति से खोजा जाना चाहिए।

चीनी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि किसी देश के निर्वाचित नेता को जबरन अपने अधिकार क्षेत्र में ले जाना गंभीर मिसाल बन सकता है, जो वैश्विक स्थिरता के लिए खतरनाक है। चीन ने यह भी जोड़ा कि वह इस कदम की कड़ी निंदा करता है और सभी पक्षों से जिम्मेदारी भरा रुख अपनाने की अपील करता है।

अमेरिका के भीतर भी इस कार्रवाई को लेकर विरोध तेज हो गया है। न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने मादुरो की गिरफ्तारी को “एक्ट ऑफ वॉर” करार दिया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून, बल्कि अमेरिकी कानून के सिद्धांतों का भी उल्लंघन करता है और इससे वैश्विक तनाव और बढ़ सकता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, 2 जनवरी की रात अमेरिकी विशेष बलों ने वेनेजुएला की राजधानी काराकस में ऑपरेशन चलाकर मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लिया और बाद में उन्हें न्यूयॉर्क ले जाया गया। वर्तमान में दोनों डिटेंशन सेंटर में हैं, जहां उन पर कथित तौर पर हथियारों और ड्रग्स से जुड़े मामलों में मुकदमा चलाने की तैयारी की जा रही है।

हिरासत के बाद सामने आई तस्वीरों ने विवाद को और भड़का दिया। कुछ तस्वीरों में मादुरो न्यूयॉर्क के स्टुअर्ट एयर नेशनल गार्ड बेस पर दिखाई दिए, जबकि एक अन्य तस्वीर में वे आंखों पर काली पट्टी और हथकड़ी के साथ नजर आए। इन तस्वीरों को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद बहस और तेज हो गई।

अमेरिका के कई शहरों—लॉस एंजेलिस, टाइम्स स्क्वायर, व्हाइट हाउस के बाहर और लास वेगास—में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर “युद्ध नहीं”, “तेल के लिए खून नहीं” और “बमबारी बंद करो” जैसे नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मादुरो को वापस वेनेजुएला भेजा जाए और सैन्य हस्तक्षेप रोका जाए।

उधर भारत ने भी स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि बढ़ते तनाव को शांत करने के लिए सभी पक्षों को संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। नई दिल्ली ने जोर दिया कि किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई क्षेत्रीय अस्थिरता को और गहरा सकती है।

कुल मिलाकर, मादुरो की हिरासत ने एक नए अंतरराष्ट्रीय संकट का रूप ले लिया है। जहां चीन और कई देशों ने इसे कूटनीति के खिलाफ कदम बताया है, वहीं अमेरिका इसे अपने कानूनी और सुरक्षा हितों से जोड़कर देख रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा वैश्विक राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।