China Birth Rate Crisis: दुनिया का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश चीन आज एक गंभीर जनसांख्यिकीय संकट से गुजर रहा है। जिस देश ने कभी “एक बच्चा नीति” लागू कर जनसंख्या पर सख्त नियंत्रण किया था, वही चीन अब घटती जन्मदर से बुरी तरह परेशान है। हालात इतने चिंताजनक हो गए हैं कि सरकार अब युवाओं को बिना कंडोम और गर्भनिरोधक गोलियों के संबंध बनाने के लिए प्रेरित कर रही है, ताकि देश में बच्चों की संख्या बढ़ाई जा सके।
गर्भनिरोधक उत्पादों पर बढ़ाया गया टैक्स
चीन सरकार ने 1 जनवरी 2026 से गर्भनिरोधक उत्पादों पर 13 प्रतिशत वैट (VAT) लागू कर दिया है। सरकार का मानना है कि यदि कंडोम और गर्भनिरोधक गोलियां महंगी होंगी तो लोग इनका उपयोग कम करेंगे और स्वाभाविक रूप से जन्मदर में बढ़ोतरी होगी।
नए टैक्स के बाद चीन में एक पैकेट कंडोम की कीमत लगभग 50 युआन यानी करीब 630 भारतीय रुपये हो गई है। वहीं, गर्भनिरोधक गोलियों का मासिक खर्च बढ़कर लगभग 130 युआन यानी करीब 1150 रुपये तक पहुंच गया है।
इसके विपरीत, सरकार ने शादी, चाइल्ड केयर और बच्चों से जुड़ी सेवाओं को टैक्स-फ्री कर दिया है, ताकि लोग परिवार बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित हों।
आखिर चीन में क्यों गिर गई जन्मदर?
चीन में जन्मदर का यह संकट अचानक नहीं आया है। इसकी जड़ें कई दशकों पुरानी नीतियों में छिपी हैं।
1960 के दशक में चीन की प्रजनन दर 7.0 से भी अधिक थी। बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने के लिए 1979 में चीन ने “एक बच्चा नीति” लागू की, जिसके कारण जनसंख्या वृद्धि तो रुकी, लेकिन इसके दीर्घकालिक दुष्परिणाम भी सामने आए।
2015 तक प्रजनन दर घटकर 1.5 तक पहुंच गई। स्थिति संभालने के लिए 2021 में चीन ने “तीन बच्चा नीति” लागू की, लेकिन इसके बावजूद लोग बच्चे पैदा करने के लिए आगे नहीं आए।
अब 2024 में यह दर ऐतिहासिक रूप से गिरकर केवल 1.0 तक पहुंच चुकी है, जो किसी भी देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना के लिए खतरनाक संकेत है।
बच्चे पैदा करने पर इनाम और सुविधाएं
जन्मदर बढ़ाने के लिए चीन सिर्फ टैक्स बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि कई आकर्षक योजनाएं भी चला रहा है। सरकार ने “नेशनल चाइल्ड केयर प्रोग्राम” के लिए करीब 90 अरब युआन (लगभग 12.7 अरब डॉलर) का बजट आवंटित किया है।
इसके तहत तीन साल से छोटे हर बच्चे के लिए परिवार को एकमुश्त 3,600 युआन यानी लगभग 45,000 भारतीय रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। इसके अलावा बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और पालन-पोषण से जुड़ी कई सेवाओं को सस्ता और सुगम बनाया जा रहा है।
चीन के सामने बड़ी चुनौती
चीन की घटती जन्मदर के कारण बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जबकि काम करने वाली युवा आबादी घटती जा रही है। इससे देश में लेबर शॉर्टेज का खतरा पैदा हो गया है, जो आने वाले वर्षों में आर्थिक विकास को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
यही वजह है कि चीन अब हर संभव उपाय अपनाकर युवाओं को परिवार बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रहा है। सरकार को उम्मीद है कि गर्भनिरोधक साधनों को महंगा कर और बच्चों से जुड़ी सुविधाओं को सस्ता बनाकर जन्मदर को फिर से बढ़ाया जा सकेगा।
हालांकि यह नीति कितनी प्रभावी साबित होगी, यह आने वाले समय में ही साफ हो पाएगा। लेकिन इतना तय है कि चीन अब जनसंख्या नियंत्रण नहीं, बल्कि जनसंख्या वृद्धि की लड़ाई लड़ रहा है।

