Budget 2026: भारत ने बदली पड़ोसी नीति, बांग्लादेश-मालदीव की मदद में कटौती

Budget 2026
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Budget 2026: में भारत ने न सिर्फ घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए अपनी प्राथमिकताएं तय की हैं, बल्कि विदेश नीति के मोर्चे पर भी एक स्पष्ट और सख्त संकेत दिया है। इस बजट में भारत ने पड़ोसी और मित्र देशों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता में बड़ा पुनर्संतुलन किया है, जिसे कूटनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। जहां कुछ देशों की मदद में कटौती की गई है, वहीं रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण और भरोसेमंद साझेदार देशों के लिए आवंटन बढ़ाया गया है।

बजट दस्तावेजों के अनुसार, भारत ने बांग्लादेश को दी जाने वाली आर्थिक सहायता को आधा कर दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 में बांग्लादेश के लिए 120 करोड़ रुपये का प्रावधान था, जिसे 2026-27 के लिए घटाकर 60 करोड़ रुपये कर दिया गया है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला अगस्त 2024 में शेख हसीना के सत्ता छोड़ने और नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बनी अंतरिम सरकार के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में आई ठंडक से जुड़ा हुआ है। हाल के महीनों में सीमा, सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर दोनों देशों के रिश्तों में तनाव देखने को मिला है।

मालदीव के मामले में भी भारत ने सख्त रुख अपनाया है। बजट 2026 में मालदीव को दी जाने वाली आर्थिक सहायता में करीब 8 प्रतिशत की कटौती की गई है और इसे घटाकर 550 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह कटौती ऐसे समय में हुई है, जब मालदीव की नई राजनीतिक नेतृत्व व्यवस्था भारत से दूरी और चीन के साथ नजदीकी बढ़ाने के संकेत दे रही है। विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम भारत की “नेबरहुड फर्स्ट” नीति के तहत यह संदेश देता है कि सहयोग पारस्परिक विश्वास और संतुलन पर आधारित होना चाहिए।

इस बजट का एक और अहम पहलू ईरान के चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट से जुड़ा है। Budget 2026 में भारत ने चाबहार बंदरगाह के लिए कोई नया आवंटन नहीं किया है। जबकि 2024-25 में इस परियोजना के लिए 400 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे और 2025-26 के संशोधित अनुमान में भी इतनी ही राशि रखी गई थी। यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि भारत ने 2024 में ईरान के चाबहार स्थित शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के संचालन के लिए 10 साल का दीर्घकालिक समझौता किया था। चाबहार पोर्ट को भारत की अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक रणनीतिक पहुंच का अहम जरिया माना जाता है। हालांकि, सरकार की ओर से इस कटौती पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।

इसके उलट, भारत ने अपने कुछ भरोसेमंद मित्र देशों के लिए आर्थिक सहायता बढ़ाकर स्पष्ट संदेश दिया है। कुल मिलाकर मित्र देशों को दी जाने वाली सहायता को बढ़ाकर 5,686 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो पिछले बजट अनुमान से लगभग 4 प्रतिशत अधिक है, हालांकि यह 2025-26 के संशोधित अनुमान से थोड़ा कम है।

भूटान को दी जाने वाली सहायता में करीब 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है और इसे 2,289 करोड़ रुपये कर दिया गया है। नेपाल के लिए आवंटन में लगभग 14 प्रतिशत की वृद्धि कर इसे 800 करोड़ रुपये किया गया है, जो दोनों देशों के बीच मजबूत विकास साझेदारी को दर्शाता है। श्रीलंका को 400 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है, जो पहले की तुलना में लगभग एक-तिहाई अधिक है और आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका के लिए भारत के समर्थन को रेखांकित करता है।

मॉरीशस के लिए सहायता में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए इसे 550 करोड़ रुपये किया गया है, जबकि अफगानिस्तान के लिए 150 करोड़ रुपये का आवंटन बरकरार रखा गया है, जो मुख्य रूप से मानवीय सहायता के लिए है। वहीं, म्यांमार के लिए आवंटन में लगभग 14 प्रतिशत की कटौती कर इसे 300 करोड़ रुपये किया गया है, जो वहां की अस्थिर राजनीतिक स्थिति को दर्शाता है।

कुल मिलाकर, Budget 2026 यह साफ करता है कि भारत अब आर्थिक सहायता को केवल उदारता नहीं, बल्कि रणनीतिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। यह बजट पड़ोसी देशों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि सहयोग, भरोसा और पारस्परिक हितों के आधार पर ही आगे बढ़ेगा।