Bangladesh Minority Violence: बांग्लादेश में सनातनी अल्पसंख्यकों पर हो रहे कथित अत्याचार, हिंसा, हत्याओं और महिलाओं की गरिमा से जुड़े मामलों के विरोध में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने शुक्रवार को टोंक जिले में जोरदार प्रदर्शन किया। मंच के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्टर टोंक कल्पना अग्रवाल के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बांग्लादेश सरकार पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाने और वहां अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गई।
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के जिला संयोजक शकील पहलवान और राष्ट्रीय संयोजक (राजस्थान प्रभारी) अबूबकर नकवी के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि बांग्लादेश में हाल के महीनों में सनातनी समुदाय के खिलाफ हिंसा और उत्पीड़न की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि देखी जा रही है। मंच का आरोप है कि वहां मंदिरों को निशाना बनाया जा रहा है, धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है और निर्दोष लोगों की जान ली जा रही है। इसके साथ ही महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा से जुड़े मामलों ने भी गंभीर चिंता पैदा की है।
हिंसा और असहिष्णुता के बढ़ते आरोप
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि जब से मोहम्मद यूनुस सत्ता में मार्गदर्शक भूमिका में आए हैं, तब से बांग्लादेश में धार्मिक असहिष्णुता और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के मामलों में तेजी आई है। मंच के नेताओं ने आरोप लगाया कि सनातनी समुदाय को भय और असुरक्षा के माहौल में जीने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और धार्मिक स्वतंत्रता के भी खिलाफ है।
भारत से अंतरराष्ट्रीय पहल की मांग
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि भारत हमेशा से मानवाधिकारों, धार्मिक सहिष्णुता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का समर्थक रहा है। ऐसे में बांग्लादेश में हो रही घटनाओं पर भारत की जिम्मेदारी बनती है कि वह इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूती से उठाए। मंच ने मांग की कि भारत सरकार संयुक्त राष्ट्र समेत अन्य वैश्विक मंचों पर बांग्लादेश सरकार पर दबाव बनाए, ताकि वहां अल्पसंख्यकों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
कड़ा संदेश देने की अपील
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि जिस तरह भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा के लिए अतीत में सख्त कदम उठाए हैं, उसी तरह बांग्लादेश को भी स्पष्ट और कड़ा संदेश देने की आवश्यकता है। मंच का कहना है कि इस तरह के कदमों से ही वहां रहने वाले सनातनी अल्पसंख्यक समुदाय को भयमुक्त वातावरण मिल सकता है और क्षेत्रीय शांति कायम रह सकती है।
सरकारों पर भी साधा निशाना
प्रदर्शन के दौरान मंच के कार्यकर्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकारों पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि “डबल इंजन सरकार अब केवल इवेंट मैनेजमेंट तक सीमित रह गई है, जबकि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं और आम लोगों की समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।” उन्होंने मांग की कि सरकारें केवल घोषणाओं तक सीमित न रहें, बल्कि जमीनी हकीकत को समझते हुए ठोस कदम उठाएं।
बड़ी संख्या में कार्यकर्ता रहे मौजूद
ज्ञापन सौंपने के दौरान अशरफ कलंदर, वसीम सैफी, इम्तियाज, ईदू पंजाबी, महमूद अली, वाहिद भाई, आबिद अली, मोहम्मद इस्लाम, जुबेर पठान, हसीन अहमद, मोहसिन खान, जुनैद खान, रईस नद्दाफी सहित बड़ी संख्या में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे कथित अत्याचारों की निंदा की और पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग की।

