Bangladesh Politics: तारिक रहमान (Tarique Rahman) का लौटना और भारत के लिए कूटनीतिक चुनौतियाँ

Tarique Rahman
Tarique Rahman

Bangladesh Politics: बांग्लादेश की राजनीति में फिर एक बड़ा मोड़ आया है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के समर्थकों ने सड़कों पर उतरकर अपने नेता तारिक रहमान (Tarique Rahman) का जोरदार स्वागत किया। 17 साल बाद लंदन से लौटे रहमान, जिन पर देश में आजीवन कारावास की सजा थी, अब सक्रिय राजनीति में पूरी ताकत के साथ उतरने के संकेत दे रहे हैं।

रहमान ने गुरुवार को ढाका में अपने समर्थकों को संबोधित किया। उनके भाषण और इशारों से यह साफ हो गया कि वे भविष्य में प्रधानमंत्री पद की दावेदारी करने की स्थिति में हैं। हालांकि, भारत के लिए रहमान की वापसी एक संवेदनशील मामला है, क्योंकि उनके पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से पुराने संबंध रहे हैं और भारत-विरोधी गतिविधियों में उनका नाम जुड़ा रहा है।


तारिक रहमान और बांग्लादेश में पिछले तख्तापलट का संदर्भ

पिछले साल बांग्लादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ हुए तख्तापलट में खालिदा जिया और तारिक रहमान की पार्टी BNP की बड़ी भूमिका बताई गई। उस दौरान भारत की खुफिया एजेंसियों ने एक रिपोर्ट में पाया कि सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान से बांग्लादेश में सामाजिक अस्थिरता फैलाने की साजिश रची गई थी।


कौन हैं तारिक रहमान?

तारिक रहमान बांग्लादेश के प्रमुख राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं। वे पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं और उनके पिता जियाउर रहमान बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति और सेना प्रमुख रह चुके हैं। जियाउर रहमान ने देश में पहला सैन्य तख्तापलट किया था।

तारिक रहमान वर्तमान में BNP के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। राजनीतिक विरासत और परिवारिक प्रभाव की वजह से वे बांग्लादेश की राजनीति में लंबे समय से एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली चेहरा बने हुए हैं।